शांतिपूर्ण आंदोलन पर कार्रवाई से भड़का ईचा-खरकई बांध विरोधी संघ, हिरासत को बताया लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन

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Chaibasa : ईचा-खरकई बांध विरोधी संघ कोल्हान, आदिवासी हो समाज युवा महासभा और अन्य सामाजिक संगठनों ने शांतिपूर्ण आंदोलन के दौरान सामाजिक अगुवाओं को हिरासत में लिए जाने की कड़ी निंदा की है। संघ के अध्यक्ष बिर सिंह बिरुली ने जिला प्रशासन पर एकतरफा कार्रवाई करने और आदिवासी समाज की लोकतांत्रिक आवाज को दबाने का आरोप लगाया।

बिरुली ने जारी बयान में कहा कि सामाजिक संगठनों ने कार्यक्रम से पूर्व प्रशासन को लिखित रूप से मध्यस्थता और वार्ता का अनुरोध किया था। इसके बावजूद प्रशासन ने कथित तौर पर सत्ता पक्ष के दबाव में सामाजिक नेताओं को बलपूर्वक हिरासत में लेकर नजरबंद कर दिया। उन्होंने बताया कि सामाजिक संगठनों के दबाव के बाद रात करीब 12 बजे उन्हें सहित 17 सामाजिक अगुवाओं को रिहा किया गया।

उन्होंने कहा कि अपने पूर्वजों के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीके से आवाज उठाने वालों को हिरासत में लेना संविधान के अनुच्छेद-19 के तहत प्राप्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार की भावना के विपरीत है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकार केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं।

बिर सिंह बिरुली ने कहा कि 21वीं सदी में भी यदि आदिवासी समाज को अपनी बात रखने पर हिरासत में लिया जाता है, तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार और झामुमो नेतृत्व अपने ही राज्य और जिले के अमर शहीदों को उचित सम्मान नहीं दे सकते, तो “अबुआ सरकार” का दावा केवल दिखावा बनकर रह जाता है।

उन्होंने कहा कि कोल्हान की धरती ने न कभी अंग्रेजों की गुलामी स्वीकार की और न किसी सत्ता की तानाशाही। आज हो समाज और कोल्हान का प्रत्येक नागरिक अपनी संस्कृति, अस्मिता और शहीदों के सम्मान की रक्षा के लिए एकजुट है तथा अपने अधिकारों की लड़ाई लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में रहकर जारी रखेगा।

संघ अध्यक्ष ने पश्चिमी सिंहभूम जिला झामुमो पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कोल्हान के वीर शहीदों की उपेक्षा कर केवल पार्टी नेतृत्व से जुड़े प्रतीकों को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि संवाद का रास्ता अपनाया जाता तो विवाद का समाधान निकाला जा सकता था, लेकिन हठधर्मिता और सत्ता के अहंकार ने स्थिति को और गंभीर बना दिया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि ईचा-खरकई बांध विरोधी संघ संविधान और कानून के दायरे में रहकर आदिवासी समाज की अस्मिता, अधिकारों और जनभावनाओं की रक्षा के लिए आगे भी संघर्ष जारी रखेगा।

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