Jamshedpur : पोटका प्रखंड के रोहनीबेड़ा एवं बड़ा झरना हिल ग्रामसभा क्षेत्र स्थित रंकिनी मंदिर परिसर में चल रहे करोड़ों रुपये की लागत वाले विकास एवं सौंदर्यीकरण कार्यों को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिली। ग्रामसभा की अनुमति के बिना योजनाओं के क्रियान्वयन का आरोप लगाते हुए पांच संयुक्त ग्रामसभाओं के ग्रामीणों ने मंगलवार को उपायुक्त कार्यालय पहुंचकर विरोध-प्रदर्शन किया और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।
पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन की पुत्री दुखनी सोरेन के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष ग्रामीण शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पिछले तीन वर्षों से रंकिनी मंदिर परिसर में बच्चों का पार्क, शौचालय, कांवरिया भवन, धुमकुड़िया भवन, मंडप, सीढ़ी और गार्ड वॉल समेत कई विकास योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन इन योजनाओं के लिए संबंधित ग्रामसभाओं से न तो अनुमति ली गई और न ही सहमति प्राप्त की गई।
ग्रामीणों का कहना है कि यह कदम ग्रामसभा के संवैधानिक अधिकारों तथा पेसा (PESA) कानून की भावना के विपरीत है। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने तख्तियां लेकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और पूरे मामले की जांच की मांग की।
दुखनी सोरेन, ग्राम प्रधान राजा सोरेन, शंकर मुंडा और सीताराम टुडू के नेतृत्व में ग्रामीणों ने उपायुक्त को छह सूत्री मांग पत्र सौंपा। मांग पत्र में विकास कार्यों की गुणवत्ता की जांच, योजनाओं की स्वीकृति प्रक्रिया की समीक्षा तथा ग्रामसभा की सहमति के बिना कराए गए कार्यों की जवाबदेही तय करने की मांग की गई।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि 10 दिनों के भीतर उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था संबंधी स्थिति उत्पन्न होती है तो इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
प्रदर्शन में रोहनीबेड़ा, बड़ा झरना हिल, चाटीकोचा, भाटीन, टिलाईटांड़ समेत आसपास के कई गांवों के ग्रामीण शामिल हुए। इस दौरान माझी बाबा राजा सोरेन, दुखनी सोरेन, शंकर मुंडा, रामजीत टुडू, सीताराम टुडू, जितेन बास्के, नागी टुडू, सबिता हांसदा, मालती किस्कू, सुभाष बेसरा, सलमा हांसदा, बैजनाथ मार्डी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
ग्रामीणों ने मांग की कि विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में ग्रामसभा की भागीदारी सुनिश्चित की जाए और स्थानीय समुदाय के अधिकारों का सम्मान करते हुए सभी निर्णय पारदर्शी तरीके से लिए जाएं।








