Adityapur : नीमडीह प्रखंड के जामडीह स्थित मानभूम कला केंद्र में रविवार को मानभूम छऊ नृत्य कला केंद्र एवं कला दल परिवार के तत्वावधान में मानभूम चैतपर्व छऊ महोत्सव 2026 का भव्य आयोजन किया गया। महोत्सव में विभिन्न दलों के कलाकारों ने मानभूम शैली के छऊ नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक तरीके से अतिथियों के स्वागत के साथ हुई, जहां आयोजक मंडली ने सभी अतिथियों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। मुख्य अतिथि जिला परिषद उपाध्यक्ष मधुश्री महतो ने अपने संबोधन में कहा कि छऊ नृत्य छोटानागपुर क्षेत्र की प्राचीन और वीर रस प्रधान मार्शल आर्ट शैली है, जिसकी उत्पत्ति लगभग 250-300 वर्ष पूर्व भूमिज जनजाति के ‘फिरकल’ युद्ध-नृत्य से मानी जाती है। उन्होंने कहा कि मुखौटों के माध्यम से रामायण और महाभारत की कथाओं को जीवंत करने वाली यह कला आज वैश्विक पहचान बना चुकी है और यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में भी शामिल है।
इस अवसर पर प्रमुख फुलमनी माझी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में छऊ नृत्य मनोरंजन का प्रमुख माध्यम है, जबकि पूर्व जिला परिषद सदस्य अनिता पारित ने जामडीह गांव की सांस्कृतिक पहचान में छऊ नृत्य की गहरी पैठ को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि यहां के कई कलाकार देश-विदेश में अपनी प्रस्तुति देकर क्षेत्र का नाम रोशन कर रहे हैं।
आयोजक मंडली ने बताया कि इस महोत्सव का उद्देश्य नए कलाकारों को मंच प्रदान करना और पारंपरिक कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। कार्यक्रम में जिला परिषद सदस्य असित सिंह पात्र, मुखिया विनापानी माझी, रूद्र प्रताप महतो, डॉ. पूर्ण चंद्र कुमार, खिरोद सिंह मुंडा, सुरेश पारित, अधर कुमार, कार्तिक महतो, कार्तिक कर्मकार सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
महोत्सव के दौरान पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज और कलाकारों की सधी हुई प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को सांस्कृतिक रंग में रंग दिया, जिससे दर्शकों में खासा उत्साह देखा गया।










