रंकिणी मंदिर धुमकुड़िया भवन में भूमिज समाज की बैठक, पेसा कानून से स्वशासन को मिलेगा नया बल

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Potka :पूर्वी सिंहभूम के पोटका प्रखंड अंतर्गत रंकिणी मंदिर परिसर स्थित धुमकुड़िया भवन में शुक्रवार को भूमिज समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को मजबूत करने और पेसा कानून के तहत ग्रामसभाओं को सशक्त बनाने पर व्यापक चर्चा हुई। बैठक में  बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे।

बैठक में सिंहभूम, मानभूम, बराहभूम और धालभूम क्षेत्र से आए हातु सरदार, मुड़ा, नाया और डाकुआ समुदाय के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सभी ने एक स्वर में पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को पुनः सशक्त और प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने पेसा (PESA) कानून के तहत ग्रामसभा को मिले अधिकारों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ग्रामसभा गांव की सर्वोच्च इकाई है, जो विकास योजनाओं से लेकर स्थानीय निर्णयों तक में अहम भूमिका निभाती है। इससे ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित होती है और स्वशासन को मजबूती मिलती है।

बैठक में यह भी बताया गया कि पूर्व में झारखंड सरकार की अधिसूचना में भूमिज समाज की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को शामिल नहीं किया गया था। लेकिन विधायक संजीव सरदार के प्रयासों से अब हातु सरदार, मुड़ा, नाया और डाकुआ व्यवस्था को आधिकारिक मान्यता मिल गई है, जिससे इनकी भूमिका और अधिक प्रभावशाली हो गई है।

अपने संबोधन में विधायक संजीव सरदार ने कहा कि राज्य गठन के करीब 25 वर्षों बाद पेसा नियमावली को मंजूरी मिलना आदिवासी स्वशासन के लिए ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि अब ग्रामसभा ही सबसे बड़ी ताकत होगी और उसकी अनुमति के बिना भूमि अधिग्रहण या विकास कार्य संभव नहीं होगा।

उन्होंने आगे कहा कि ग्रामीण अब जल, जंगल और जमीन के साथ-साथ लघु वन उपज एवं खनिज संसाधनों का प्रबंधन स्वयं कर सकेंगे। साथ ही स्थानीय विवादों का समाधान भी पारंपरिक व्यवस्था के तहत किया जा सकेगा। उन्होंने सभी हातु सरदार, मुड़ा, नाया और डाकुयाओं से आह्वान किया कि वे अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए गांवों को सशक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।

इस अवसर पर मुखिया अभिषेक सरदार, कालीपद सरदार, सिडेश्वर सरदार, हरिश्चंद्र सिंह भूमिज, सुदर्शन भूमिज, सुबोध सरदार, शत्रुघ्न सरदार, रथु सिंह सरदार, रामेश्वर सरदार, श्याम चरण सरदार, बादल सरदार, हिमांशु सरदार, मनोरंजन सरदार, बिहारी लाल सरदार, बसंती सरदार, सुनाराम सरदार, देवनाथ सरदार, बुगनु सरदार और विश्वरथ सिंह समेत बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे।

बैठक ने स्पष्ट संकेत दिया कि आने वाले समय में पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ ग्रामसभाएं ग्रामीण प्रशासन की धुरी बनेंगी और पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को नई दिशा मिलेगी।

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