जमशेदपुर में अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर भव्य आयोजन, विद्यासागर के योगदान पर विशेष व्याख्यान

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Jamshedpur:अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर 21 फरवरी को शहर में भाषाई अस्मिता, सांस्कृतिक गौरव और साहित्यिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला। झारखंड बंगभाषी समन्वय समिति द्वारा आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में भाषा प्रेमियों, बुद्धिजीवियों और विभिन्न भाषाई समुदायों के प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
विश्व स्तर पर मनाए जाने वाले International Mother Language Day के इस अवसर पर मातृभाषा के संरक्षण और

संवर्धन का सामूहिक संकल्प दोहराया गया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बंगला भाषा के महान पुरोधा Ishwar Chandra Vidyasagar के योगदान पर विस्तृत व्याख्यान रहा।

मुख्य वक्ता के रूप में पश्चिम बंगाल वाममोर्चा के चेयरमैन Biman Bose उपस्थित थे। उन्होंने अपने प्रभावशाली संबोधन में कहा कि विद्यासागर ने बंगला भाषा को सरल, सुगम और जनसुलभ बनाने के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। ‘बर्ण परिचय’ के माध्यम से उन्होंने न केवल बच्चों के लिए भाषा शिक्षण को आसान बनाया, बल्कि नैतिक मूल्यों का भी बीजारोपण किया।

विमान बोस ने कहा कि विद्यासागर केवल एक शिक्षाविद नहीं, बल्कि दूरदर्शी समाज सुधारक भी थे। विधवा विवाह कानून के समर्थन में उनका संघर्ष भारतीय सामाजिक इतिहास में मील का पत्थर है। उन्होंने शिक्षा की ज्योति उन वर्गों तक पहुंचाई जो सामाजिक रूप से उपेक्षित थे। झारखंड के कर्माटार में शिक्षा और चिकित्सा व्यवस्था स्थापित कर उन्होंने सेवा और समर्पण का आदर्श प्रस्तुत किया।

उन्होंने जोर देकर कहा कि जिस प्रकार बंगला हमारी मातृभाषा है, उसी प्रकार अन्य सभी भाषाओं का सम्मान करना भी हमारा दायित्व है। बंगला भाषा की समृद्ध लिपि, साहित्यिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत इसे सदैव जीवंत बनाए रखेगी।

कार्यक्रम में विभिन्न भाषाई समुदायों के प्रतिनिधियों ने अपनी-अपनी मातृभाषाओं की रक्षा और विकास के समर्थन में स्वर बुलंद किए।

सांस्कृतिक सत्र के दौरान टैगोर स्कूल ऑफ आर्ट्स की श्रीमती चंदना चौधुरी और उनकी टीम ने मनमोहक प्रस्तुति दी। “मोदी गौरब, मोदेर आशा अमोरी बंगला भाषा…”, “बांग्लार माटी, बांग्लार जल…”, “ओगो, तोमार चोखू दिए…” और “आमादेर नानान मोते नानान दले…” जैसे गीतों ने वातावरण को भावविभोर कर दिया।

समिति के अध्यक्ष विकास मुखर्जी ने स्वागत भाषण देते हुए मातृभाषा की अस्मिता को बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई, जबकि महासचिव संदीप सिन्हा चौधुरी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम में नेपाल चंद्र दास, गोबिंद मुखर्जी, पूरबी घोष, बनश्री सरकार, उदय सोम, अरुण दासगुप्त, मिहिर दास, सोमा घोष, सुलेखा डे, दीपिका बनर्जी, शिल्पी, अभिषेक सिन्हा और तरुण बोस सहित अनेक गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।

भाषा, संस्कृति और साहित्य के इस संगम ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया कि मातृभाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि पहचान, विरासत और आत्मसम्मान का प्रतीक है।

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