झारखंड की भू-विरासत के संरक्षण की पहल, सरयू राय ने विधानसभा अध्यक्ष को दी जीवाश्म विधेयक पेश करने की सूचना

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Jamshedpur : जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने विधानसभा के बजट सत्र–2026 में गैर-सरकारी विधेयक के रूप में “झारखंड भू-विरासत (जीवाश्म) विधेयक” प्रस्तुत करने की सूचना विधानसभा अध्यक्ष रवीन्द्र नाथ महतो को दी है। उन्होंने इस विधेयक को सदन से पारित कर अधिनियमित करने का भी आग्रह किया है।

सरयू राय ने कहा कि झारखंड के राजमहल की पहाड़ियों में अनेक स्थानों पर काष्ठ जीवाश्म (पेट्रिफाइड वुड) प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। साहेबगंज में सरकार द्वारा एक जीवाश्म पार्क का निर्माण किया गया है, लेकिन इसके अलावा साहेबगंज जिले के अन्य हिस्सों तथा पाकुड़ जिला में भी बड़ी संख्या में जीवाश्म मौजूद हैं। संरक्षण की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण मानवीय गतिविधियों से यह अमूल्य प्राकृतिक धरोहर धीरे-धीरे नष्ट होती जा रही है।

उन्होंने बताया कि करीब 12 से 14 करोड़ वर्ष पूर्व जलवायु परिवर्तन और अन्य प्राकृतिक कारणों से धरती की सतह पर बड़े बदलाव हुए थे। उस काल में वृक्ष और वनस्पतियां विभिन्न खनिजों और रसायनों के संपर्क में आकर हू-ब-हू प्रस्तर (पत्थर) के रूप में परिवर्तित हो गईं। आज वही अवशेष जीवाश्म के रूप में मौजूद हैं, जो वैज्ञानिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण विरासत हैं।

सरयू राय ने स्पष्ट किया कि इस विधेयक का उद्देश्य जीवाश्मों का समुचित संरक्षण, विरासत स्थलों का विकास, तथा इनके संरक्षण हेतु कानूनी ढांचा तैयार करना है। विधेयक के अधिनियमित होने के बाद सरकार द्वारा एक नियमावली बनाई जाएगी, जिससे झारखंड की भू-विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके।
उनका कहना है कि यह पहल न केवल झारखंड की प्राकृतिक पहचान को मजबूती देगी, बल्कि पर्यटन, शोध और शिक्षा के क्षेत्र में भी नए अवसर पैदा करेगी।

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