नाटक मंचन कर लड़कियों ने मांगा “चयन का अधिकार”

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Jamshedpur:सामाजिक बदलाव की गूंज अब गांवों तक पहुंच चुकी है। सेल्फ एक्शन प्रोजेक्ट के तहत सामाजिक संस्था “युवा” जमशेदपुर और क्रिया सेल्फ लीडर एवं ट्रेनर के सहयोग से हल्दीपोखर के नवदीपनगर में गुरुवार को एक प्रेरक नुक्कड़ नाटक का मंचन किया गया।
इस नाटक का उद्देश्य था—समुदाय को यह संदेश देना कि हर लड़की को अपनी शिक्षा, जीवन और आज़ादी चुनने का अधिकार है।

नाटक की शुरुआत संवादक श्रुति सरदार ने की। उन्होंने बताया कि आज भी कई लड़कियाँ जल्दी शादी, घरेलू जिम्मेदारियों या समाज की पुरानी सोच के कारण अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ देती हैं।

मंच पर प्रस्तुत कहानी ‘पार्वती’ की थी — एक ऐसी होनहार और सपने देखने वाली लड़की की, जो डॉक्टर बनना चाहती है लेकिन समाज की पितृसत्तात्मक सोच और पारिवारिक दबाव उसके रास्ते में रोड़े अटकाते हैं।
संवेदनशील संवादों और सशक्त अभिनय के ज़रिए नाटक ने यह सवाल उठाया कि “क्या किसी बेटी के सपनों पर समाज का निर्णय भारी पड़ना चाहिए?”

नाटक में भाग लेने वाली प्रतिभागी — किरण सरदार, रीना सरदार, स्मृति सरदार, मानिक सरदार, श्रुति सरदार और अंजली — ने अपने अभिनय से दर्शकों की खूब सराहना बटोरी।
इस अवसर पर ट्रेनर कापरा माझी और संस्था “युवा” के कार्यकर्ता अरूप मंडल की भूमिका कार्यक्रम को सफल बनाने में अहम रही।

कार्यक्रम के अंत में ग्रामीणों ने भी एक स्वर में कहा —
“हर बेटी को मिलना चाहिए — चयन का अधिकार!”

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