प्रशासनिक लापरवाही से गई तीन श्रद्धालुओं की जान, एसडीओ की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

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Adityapur : आस्था के महापर्व छठ पर स्वर्णरेखा नदी के शहरबेड़ा घाट पर हुए हादसे ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया है। तीन श्रद्धालुओं की डूबने से मृत्यु ने प्रशासनिक तैयारियों की वास्तविकता को सामने ला दिया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अनुमंडल प्रशासन ने न तो घाटों का निरीक्षण किया और न ही सुरक्षा के बुनियादी प्रबंध।

सूत्रों के अनुसार जिला प्रशासन ने पहले ही निर्देश जारी करते हुए सभी अधिकारियों को घाटों का भौतिक निरीक्षण कर सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा था। उपायुक्त स्वयं तैयारी का जायजा ले रहे थे, लेकिन चांडिल अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा इन आदेशों का पालन नहीं किया गया। न तो बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई, न गोताखोरों की तैनाती और न ही जलस्तर को लेकर कोई सतर्कता बरती गई।

स्थानीय श्रद्धालुओं और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शहरबेड़ा घाट संवेदनशील श्रेणी में आता है और यहां पूर्व में भी हादसे हो चुके हैं। बावजूद इसके एसडीओ और बीडीओ ने स्थल निरीक्षण तक नहीं किया। प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा यह हुआ कि छठ पूजा के दौरान नदी में उतरे श्रद्धालु वापस नहीं लौट सके।

ग्रामीणों का कहना है कि केवल कागज़ी खानापूर्ति और बैठकों से जनसुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो सकती। यदि समय रहते निरीक्षण होता और सुरक्षा व्यवस्था मुहैया कराई जाती तो यह त्रासदी टल सकती थी।

अब सवाल यह है कि प्रशासन लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई करेगा? क्या जनहित सर्वोपरि साबित होगा या फिर यह घटना भी फाइलों में दब कर रह जाएगी?

इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पर्व चाहे कितना भी पवित्र हो, यदि प्रशासन सजग न हो तो वह उत्सव शोक में बदल सकता है।

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