जमशेदपुर को-ऑपरेटिव लॉ कॉलेज में नामांकन प्रक्रिया में देरी पर पूर्व छात्र ने उठाई आवाज, केंद्र सरकार से की शिकायत

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कोल्हान विश्वविद्यालय की सुस्त कार्यशैली पर सवाल, परीक्षा नियंत्रक को बदलने की मांग

जमशेदपुर, 6 जून — कोल्हान विश्वविद्यालय की लापरवाह और सुस्त कार्यशैली के खिलाफ जमशेदपुर को-ऑपरेटिव लॉ कॉलेज के पूर्व छात्र अमर कुमार तिवारी ने भारत सरकार के उच्च शिक्षा मंत्रालय से शिकायत की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय का परीक्षा विभाग पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो चुका है, जिससे कॉलेज के छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में लटक गया है।

अमर कुमार तिवारी द्वारा दायर शिकायत में कहा गया है कि सत्र 2024–2027 के लिए अब तक नामांकन प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है, जबकि कॉलेज को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) से मान्यता मिल चुकी है। पूरे झारखंड के अन्य लॉ कॉलेजों में जनवरी में ही नामांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, परंतु कोल्हान विश्वविद्यालय अब तक संबंधित नोटिफिकेशन भी जारी नहीं कर सका

शिकायत को नज़रअंदाज़ करने का आरोप

अमर कुमार ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने इस विषय में पहले भी कई बार विश्वविद्यालय से संपर्क किया, लेकिन हर बार यह कहकर मामले को टाल दिया गया कि “प्रक्रिया में है।” उन्होंने इसे छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करार देते हुए कहा कि यह लापरवाही कॉलेज की साख को भी नुकसान पहुँचा रही है।

परीक्षा नियंत्रक को बदलने की मांग

उन्होंने केंद्र सरकार से कोल्हान विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक को बदलने की मांग की है और कहा है कि जब तक प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय नहीं की जाएगी, तब तक ऐसी समस्याएं लगातार बनी रहेंगी।
उन्होंने अपील की, “कृपया सरकार इस मामले में हस्तक्षेप करे और परीक्षा नियंत्रक को हटाकर कॉलेज को राहत दे, ताकि समय पर नामांकन की प्रक्रिया पूरी हो सके। वरना छात्रों का लॉ की पढ़ाई पूरी करने में तीन साल की जगह पांच साल लग जाएंगे, जिससे युवा वर्ग हतोत्साहित होगा।

कॉलेज की साख पर असर

पूर्व छात्र ने चेतावनी दी कि यदि इसी तरह देरी होती रही, तो छात्र नामांकन लेने से कतराएँगे, जिससे कॉलेज की छवि खराब होगी और उसका अस्तित्व भी संकट में पड़ सकता है।

मांगों का सारांश:

  1. कोल्हान विश्वविद्यालय द्वारा नामांकन प्रक्रिया में शीघ्रता लाने की मांग
  2. परीक्षा नियंत्रक को तत्काल प्रभाव से हटाने की मांग
  3. केंद्र सरकार से कॉलेज की स्थिति पर ध्यान देने और हस्तक्षेप करने की अपील

यह मामला झारखंड में उच्च शिक्षा के स्तर और विश्वविद्यालयीय प्रशासन की निष्क्रियता को एक बार फिर सवालों के घेरे में खड़ा करता है। देखना होगा कि क्या केंद्र सरकार इस मामले में हस्तक्षेप करती है या छात्रों को लंबा इंतज़ार करना पड़ेगा।