Manoharpur : पश्चिम सिंहभूम जिले के नक्सल प्रभावित सारंडा जंगल में चल रहे नक्सल विरोधी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों को बहुआयामी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। यहां जवानों के लिए खतरा केवल नक्सलियों की गोलियों और आईईडी तक सीमित नहीं है, बल्कि प्राकृतिक परिस्थितियां भी अभियान को और कठिन बना रही हैं।
घने जंगलों में फैले मलेरिया जनित मच्छर और आक्रामक मधुमक्खियां अब सुरक्षा बलों के लिए गंभीर जोखिम बनकर सामने आई हैं। मंगलवार सुबह मधुमक्खियों के अचानक हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के चार जवान घायल हो गए। सभी घायलों को तत्काल मनोहरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।
सूत्रों के अनुसार, सारंडा क्षेत्र में पहले से ही नक्सलियों द्वारा बिछाए गए आईईडी अभियान को बेहद जोखिमपूर्ण बना रहे हैं। इसके साथ ही मलेरिया का प्रकोप भी लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। हाल ही में अभियान में शामिल एक जवान की मलेरिया संक्रमण के कारण मौत हो चुकी है, जिससे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
अब मधुमक्खियों के हमले जैसी घटनाएं इस ऑपरेशन में नई चुनौती बनकर उभरी हैं, जिससे जंगल में अभियान चला रहे जवानों की सुरक्षा और भी जटिल हो गई है।
इन विषम परिस्थितियों के बावजूद भारतीय सुरक्षा बल के जवान साहस और प्रतिबद्धता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियां अभियान को सफल बनाने के लिए हर स्तर पर सतर्कता और रणनीति के साथ आगे बढ़ रही हैं।










