BJP Leaders Acquitted 13 साल बाद आए  फैसले ने भाजपा नेताओं को बड़ी राहत दी है। यह मामला सत्ता के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों में कानूनी उलझनों का एक उदाहरण रहा है। कोर्ट के फैसले से यह स्पष्ट हुआ कि बिना पुख्ता सबूतों के किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

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Jamshedpur :जमशेदपुर में 13 साल पुराने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) मानगो शाखा में तोड़फोड़ के मामले में सात भाजपा नेताओं को न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। 2012 के भारत बंद के दौरान हुए इस मामले में दर्ज मुकदमे में कोर्ट ने पर्याप्त सबूत नहीं मिलने पर सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया।

क्या था पूरा मामला?

2012 में भारतीय जनता पार्टी द्वारा भारत बंद का आयोजन किया गया था। इसी दौरान, SBI मानगो शाखा में तोड़फोड़ और सरकारी काम में बाधा पहुंचाने का मामला दर्ज किया गया था। इसमें भाजपा नेता विकास सिंह, गुंजन यादव, राजेश सिंह, मनोज सिंह, सुनील सिंह, सूरज नारायण और टोनी सिंह को अभियुक्त बनाया गया था।

13 साल की कानूनी लड़ाई – गवाही और बचाव पक्ष का तर्क

मामले की सुनवाई के दौरान स्टेट बैंक ऑफ इंडिया मानगो शाखा के तत्कालीन मैनेजर और मानगो थाना के तत्कालीन थानेदार ने गवाही दी। हालांकि, वे सिर्फ भाजपा नेता विकास सिंह की पहचान कर सके और अन्य अभियुक्तों के खिलाफ कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाए।

अधिवक्ता मलकीत सिंह और मनप्रीत सिंह ने बचाव पक्ष की ओर से तर्क दिया कि सभी आरोप बेबुनियाद हैं और अभियुक्त केवल बंद के समर्थन में बैंक के पास से गुजर रहे थे। कोर्ट में पर्याप्त साक्ष्य नहीं होने के कारण प्रथम न्यायिक दंडाधिकारी अरविंद कुमार ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया।

एक अभियुक्त की हत्या, बाकी सभी को कोर्ट से मिली राहत

इस मामले में नामजद सात अभियुक्तों में से टोनी सिंह की कुछ महीने पहले हत्या हो गई थी, जिसके चलते उसे मुकदमे से अलग कर दिया गया था। बाकी छह नेताओं को कोर्ट ने बरी कर दिया।

पूर्व भाजपा नेता विकास सिंह ने क्या कहा?

मुकदमे से बरी होने के बाद पूर्व भाजपा नेता विकास सिंह ने इसे सत्य की जीत बताया। उन्होंने कहा,

“बेवजह हमारे ऊपर यह मुकदमा किया गया था, लेकिन कोर्ट में हमेशा सच की ही जीत होती है। आज न्याय हुआ है। मैं अपने अधिवक्ता मलकीत सिंह, मनप्रीत सिंह और न्यायालय का आभार प्रकट करता हूं।”

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