persecution in Bengal,Mamata Banerjee Bengal riots भारत के राष्ट्रपति को सौंपे गए ज्ञापन में पश्चिम बंगाल में बढ़ती हिंसा, हिंदू उत्पीड़न और वक्फ कानून के विरोध के दौरान प्रशासनिक विफलता का हवाला देते हुए राष्ट्रपति शासन की मांग की गई है।

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Jamshedpur :। पश्चिम बंगाल में वक्फ कानून के विरोध के नाम पर भड़की हिंसा को लेकर अब राष्ट्रव्यापी आक्रोश तेज़ होता जा रहा है। इसी क्रम में पूर्वी सिंहभूम जिले के नागरिकों ने महामहिम राष्ट्रपति महोदया को उपायुक्त के माध्यम से एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग की गई है।

ज्ञापन में स्पष्ट आरोप लगाया गया है कि बंगाल में ममता बनर्जी सरकार पूर्ण रूप से विफल हो चुकी है और राज्य में हिंदुओं के विरुद्ध संगठित हिंसा, लूट, हत्या व पलायन जैसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। यह हिंसा 11 अप्रैल 2025 को मुर्शिदाबाद से शुरू हुई, और अब पूरे बंगाल को अपनी चपेट में ले चुकी है।

हिंदुओं के खिलाफ हिंसा सुनियोजित, ममता सरकार पर उठे गंभीर आरोप

ज्ञापन में कहा गया है कि यह आंदोलन वक्फ कानून के विरोध के नाम पर शुरू जरूर हुआ, लेकिन इसका उद्देश्य हिंदू समाज को निशाना बनाना था। सैकड़ों हिंदुओं के घर जलाए गए, दुकानें लूटी गईं, महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार हुआ और कई लोगों की हत्या तक कर दी गई।

ज्ञापन में ममता बनर्जी पर हिंसा भड़काने वालों से मिलने और पीड़ितों की अनदेखी करने का आरोप भी लगाया गया है। साथ ही यह भी कहा गया कि उनकी सरकार अब शरणार्थियों को जबरन वापस हिंसक इलाकों में भेजने का षड्यंत्र कर रही है।

ज्ञापन में रखी गईं चार प्रमुख मांगे:

1. पश्चिम बंगाल में तत्काल राष्ट्रपति शासन लागू किया जाए।


2. हिंसा की जांच NIA के माध्यम से करवाई जाए और दोषियों को सख्त सजा दी जाए।


3. कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी केंद्रीय बलों को दी जाए।


4. बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें तत्काल निष्कासित किया जाए, साथ ही सीमाओं पर तारबंदी की जाए।


राष्ट्रीय सुरक्षा और सांप्रदायिक सौहार्द पर संकट: ज्ञापनदाताओं की चेतावनी

ज्ञापन में यह भी चेताया गया है कि यदि स्थिति पर शीघ्र नियंत्रण नहीं पाया गया, तो यह हिंसा बंगाल से निकलकर अन्य राज्यों तक फैल सकती है, जिससे राष्ट्र की अखंडता व सुरक्षा पर गहरा संकट खड़ा हो सकता है।

ज्ञापन में अंततः विश्वास व्यक्त किया गया है कि महामहिम राष्ट्रपति भारत की एकता और सांप्रदायिक सौहार्द को बनाये रखने के लिए अविलंब कठोर निर्णय लेंगी।


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