Jamshedpur : टाटानगर रेल सिविल डिफेंस की ओर से भारत सरकार की सर्पदंश रोकथाम, नियंत्रण एवं संरक्षण योजना के तहत रेल कर्मियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इलेक्ट्रिक लोको पायलट प्रशिक्षण केंद्र के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में रांची, आद्रा, खड़गपुर और चक्रधरपुर मंडल के 140 वरिष्ठ लोको पायलट एवं सहायक लोको पायलटों ने भाग लिया।
प्रशिक्षण के दौरान सिविल डिफेंस इंस्पेक्टर एवं राष्ट्रपति पदक से सम्मानित संतोष कुमार ने बताया कि झारखंड में करैत (चित्ती) सांप के काटने की घटनाएं अधिक होती हैं। यह सांप अक्सर रात में बिस्तर पर सोए लोगों को काटता है। इसके काटने पर तत्काल दर्द नहीं होता, जिससे लोग इसे सामान्य कीड़े के काटने की घटना समझकर इलाज में लापरवाही कर बैठते हैं। समय पर उपचार नहीं मिलने पर 4 से 6 घंटे के भीतर जान जाने का खतरा रहता है।
उन्होंने बताया कि रसेल वाइपर (Russell’s Viper) भी अत्यंत विषैला सांप है, जो खेतों, खलिहानों, पत्थरों, लकड़ियों और ईंटों के ढेर में छिपा रहता है। इसके काटने पर दो स्पष्ट दांतों के निशान दिखाई देते हैं। ऐसे मामलों में तत्काल चिकित्सा मिलने से पीड़ित की जान बचाई जा सकती है।
प्रशिक्षण में डिजिटल प्रस्तुति, टेली फिल्म, पावर प्वाइंट और डमी सर्प के माध्यम से विषैले एवं विषहीन सांपों की पहचान, सर्पदंश के लक्षण, प्राथमिक उपचार और विष के शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों की जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को न्यूरोटॉक्सिक, हेमोटॉक्सिक और मायोटॉक्सिक विष के प्रभावों से भी अवगत कराया गया।
संतोष कुमार ने बताया कि भारत में सांपों की लगभग 275 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें केवल करीब 15 प्रतिशत ही विषैले होते हैं। इनमें भी लगभग 20 प्रतिशत मामलों में ड्राई बाइट होती है, जिसमें विष शरीर में नहीं जाता। उन्होंने सर्पदंश की स्थिति में घबराने के बजाय मरीज का मनोबल बनाए रखने, ओझा-गुनी और अंधविश्वास से बचने तथा तुरंत अस्पताल पहुंचने की सलाह दी।
कार्यक्रम के दौरान डेमोंस्ट्रेटर शंकर कुमार प्रसाद ने विभिन्न प्रकार की बैंडेज तकनीक, अग्निशामक यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) के उपयोग और सीपीआर (CPR) की मॉक ड्रिल के माध्यम से व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया।
प्रशिक्षण में शामिल वरिष्ठ लोको पायलटों ने कहा कि ड्यूटी के दौरान रेल पटरियों और दूरस्थ क्षेत्रों में सर्पदंश का खतरा बना रहता है। ऐसे में टाटानगर रेल सिविल डिफेंस द्वारा दिया गया यह व्यवहारिक प्रशिक्षण उनके लिए अत्यंत उपयोगी और जीवनरक्षक साबित होगा।
















