National Youth Day Celebration, नारायण आईटीआई में स्वामी विवेकानंद जयंती और राष्ट्रीय युवा दिवस का भव्य आयोजन

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स्वामी विवेकानंद की जयंती और राष्ट्रीय युवा दिवस का आयोजन

Jamshedpur 12 जनवरी 2025 को नारायण आईटीआई लुपुंगडीह, चांडिल में स्वामी विवेकानंद की जयंती और राष्ट्रीय युवा दिवस का आयोजन बड़े हर्षोल्लास के साथ किया गया। इस अवसर पर संस्थान के संस्थापक डॉ. जटाशंकर पांडे ने स्वामी विवेकानंद के जीवन और उनके योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वेदान्त के इस महान गुरु ने न केवल भारतीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व किया बल्कि युवाओं को जीवन के सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित भी किया।

स्वामी विवेकानंद का जीवन और शिक्षा दर्शन

डॉ. पांडे ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का वास्तविक नाम नरेंद्रनाथ दत्त था। उनका जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता के एक कुलीन परिवार में हुआ था। उन्होंने 1893 में शिकागो में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत का प्रतिनिधित्व किया और “मेरे अमेरिकी बहनों और भाइयों” से अपने संबोधन की शुरुआत कर पूरे विश्व का दिल जीत लिया।

1. शिक्षा से शारीरिक, मानसिक और आत्मिक विकास होना चाहिए।

2. बालक और बालिकाओं को समान शिक्षा दी जानी चाहिए।

3. धार्मिक शिक्षा पुस्तकों से नहीं, बल्कि आचरण और संस्कारों से दी जाए।

4. शिक्षा जीवन संघर्ष से लड़ने की शक्ति प्रदान करे।

5. देश की आर्थिक प्रगति के लिए तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा दिया जाए।

युवाओं को दी सफलता की प्रेरणा

डॉ. पांडे ने कहा कि स्वामी विवेकानंद की शिक्षा हमें सिखाती है कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि सच्चा पुरुष वही होता है जो हर परिस्थिति में नारी का सम्मान करता है।

कार्यक्रम में अतिथियों और छात्रों की उपस्थिति

इस आयोजन में कई विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे, जिनमें एडवोकेट निखिल कुमार, अरुण पांडे, अनूप कुमार महतो, जयदीप पांडे, शांति राम महतो, प्रकाश महतो, पवन कुमार महतो और कृष्ण पद महतो प्रमुख थे। संस्थान के सभी छात्र-छात्राएं इस अवसर पर उपस्थित रहे।

स्वामी विवेकानंद की शिक्षा से प्रेरणा

कार्यक्रम के दौरान स्वामी विवेकानंद की जीवन यात्रा पर आधारित कहानियों और उनके उपदेशों को साझा किया गया। इन प्रेरक विचारों ने छात्रों और उपस्थित जनों को जीवन में सच्चाई, समर्पण और लक्ष्य के प्रति अडिग रहने की शिक्षा दी।

इस आयोजन ने न केवल स्वामी विवेकानंद के योगदान को सम्मान दिया बल्कि युवाओं को उनके आदर्शों पर चलने की प्रेरणा दी। नारायण आईटीआई का यह

प्रयास समाज और युवाओं के लिए एक प्रेरणादायक संदेश बनकर उभरा।

 

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