वकीलों ने मौन धारण कर दी दिशोम गुरु शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि, कहा – झारखंड की आत्मा आज मौन है

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Jamshedpur : झारखंड अलग राज्य आंदोलन के प्रणेता, पूर्व मुख्यमंत्री एवं झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन पर जमशेदपुर के वकील समुदाय ने गहरा शोक व्यक्त किया। इस अवसर पर जिला व्यवहार न्यायालय परिसर स्थित न्यू बार बिल्डिंग में एक शोकसभा का आयोजन कर दो मिनट का मौन रखा गया और उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

समाजवादी चिंतक अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू ने शोकसभा को संबोधित करते हुए कहा कि, “शिबू सोरेन केवल एक नेता नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता और झारखंड की आत्मा थे। उन्होंने झारखंड को सूदखोरों के अत्याचार से मुक्ति दिलाई और सामाजिक न्याय की लड़ाई को मजबूती दी। उनका योगदान झारखंड के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा।”

पूर्व लोक अभियोजक पी.एन. गोप ने कहा, “शिबू सोरेन झारखंड के भूमि पुत्रों के सदियों पुराने सपनों को साकार करने वाले मार्गदर्शक थे। आज उनके बेटे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जल, जंगल, जमीन के अधिकार को मूर्त रूप देने में लगे हुए हैं, जो गुरुजी की ही आकांक्षाओं का विस्तार है।”

शोकसभा में बड़ी संख्या में वरिष्ठ और युवा अधिवक्ताओं की भागीदारी रही, जिन्होंने गुरुजी के योगदान को याद करते हुए उनके संघर्षशील जीवन को नमन किया।


इस दौरान मुख्य रूप से रतन चक्रवर्ती, टी.एन. ओझा, प्रीति ओझा, कुलविंदर सिंह, कोमल वर्मा, गणेश टुडू, रामजीत पांडेय, राज कुमार शर्मा, पवन कुमार, राजू सिंह, नरहरी आचार्य, चंदन भट्टाचार्य, राहुल राय, सुनील महतो, बबीता जैन, सेटिंग बरला, मुक्ति रानी, सुकांति हेंब्रम, धनेश्वर महतो, ओम प्रकाश सिंह, धनुराम हेंब्रम, मनोज मेलगांडी, उमेश साहू, राहुल यादव सहित अनेक अधिवक्ता उपस्थित रहे। वकील समुदाय ने गुरुजी के निधन को राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक जीवन की गहन क्षति बताया।

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