शिक्षा, संवाद और सतर्कता का संगम बना कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय का अभिभावक–शिक्षक सम्मेलन

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Ghatshila:घाटशिला प्रखण्ड के गालूडीह स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय परिसर में मंगलवार को आयोजित अभिभावक–शिक्षक सम्मेलन महज़ एक औपचारिक बैठक नहीं रहा, बल्कि यह शिक्षा, संस्कार और भविष्य की चुनौतियों पर गंभीर मंथन का सशक्त मंच बनकर उभरा। विद्यालय प्रबंधन और अभिभावकों के बीच हुए इस संवाद ने यह स्पष्ट कर दिया कि बालिकाओं का सर्वांगीण विकास तभी संभव है, जब शिक्षा के साथ संस्कार और सतर्कता का संतुलन बना रहे।
व्यस्त कार्यक्रम के कारण विधायक श्री सोमेश चन्द्र सोरेन स्वयं उपस्थित नहीं हो सके, लेकिन उनके प्रतिनिधित्व में प्रखण्ड अध्यक्ष दुर्गा चरण मुर्मू की मौजूदगी ने कार्यक्रम को नेतृत्व और दिशा प्रदान की। उनके साथ वरिष्ठ नेता काजल डॉन, सुजय सिंह, अम्पा हेंब्रम, सब्यसाची चौधरी एवं उपमुखिया कपिल देव शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति ने सम्मेलन की महत्ता को और बढ़ा दिया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत गीत, संगीत और नृत्य ने दर्शकों का मन मोह लिया। इन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने यह संदेश दिया कि कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में पढ़ाई के साथ-साथ रचनात्मकता और आत्मविश्वास को भी समान रूप से महत्व दिया जा रहा है। अभिभावकों के चेहरे पर गर्व और संतोष साफ झलक रहा था।
सम्मेलन में वक्ताओं ने डिजिटल युग की वास्तविकताओं पर भी खुलकर चर्चा की। इंटरनेट और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच बच्चों को मिलने वाले अवसरों के साथ-साथ संभावित खतरों को लेकर अभिभावकों को जागरूक किया गया। यह संदेश प्रमुखता से सामने आया कि तकनीक का सही उपयोग ही बच्चों को उज्ज्वल भविष्य की ओर ले जा सकता है।
इस अवसर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं और सक्रिय अभिभावकों को सम्मानित कर उनकी सहभागिता को सराहा गया। कार्यक्रम के समापन पर प्रखण्ड अध्यक्ष दुर्गा चरण मुर्मू ने विद्यालय प्रबंधन की सराहना करते हुए सफल आयोजन और आत्मीय स्वागत के लिए धन्यवाद दिया तथा विद्यालय के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
सम्मेलन में बीआरपी संजीव दत्ता, सीआरपी नसीमा बानो, वार्डन अंजनी कुमारी, विद्यालय अध्यक्ष बानो टुडू, लक्ष्मी मुंडा, शांति बारी, ममता कुमारी, आभा महापात्र, मौसमी गिरी, अर्चना कुमारी एवं श्रुति कुमारी सहित अन्य शिक्षकगण उपस्थित रहे।
कुल मिलाकर यह सम्मेलन शिक्षा को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखकर समाज, परिवार और तकनीक के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक सार्थक और दूरदर्शी पहल के रूप में याद किया जाएगा।

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