31 जुलाई तक भरें ITR, वरना लगेगी लेट फीस और ब्याज; टैक्स एक्सपर्ट्स ने समय रहते रिटर्न दाखिल करने की दी सलाह

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नई दिल्ली। यदि आपने अभी तक आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल नहीं किया है, तो अब देर करना महंगा पड़ सकता है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आईटीआर-1 और आईटीआर-2 फॉर्म के माध्यम से रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 निर्धारित है। इस समय सीमा के बाद भी 31 दिसंबर 2026 तक बेलटेड (लेट) रिटर्न दाखिल किया जा सकेगा, लेकिन इसके लिए लेट फीस, ब्याज और कुछ महत्वपूर्ण कर लाभों से वंचित होना पड़ सकता है।

आयकर विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 23 जुलाई तक देशभर में 3 करोड़ से अधिक करदाताओं ने अपना आयकर रिटर्न दाखिल कर दिया है। टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि अंतिम समय का इंतजार करने के बजाय समय रहते रिटर्न भरना अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक है। इससे पोर्टल पर बढ़ते ट्रैफिक, सर्वर संबंधी दिक्कतों और दस्तावेजों में होने वाली त्रुटियों से बचा जा सकता है। साथ ही समय पर रिटर्न दाखिल करने वालों को रिफंड भी अपेक्षाकृत जल्दी मिल जाता है।

क्लियरटैक्स की टैक्स एक्सपर्ट सीए चांदनी आनंदन के अनुसार, अंतिम दिनों में पोर्टल पर अत्यधिक दबाव रहने की वजह से तकनीकी समस्याएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में करदाताओं को सलाह दी जाती है कि वे समय रहते अपना रिटर्न दाखिल कर दें और ई-वेरिफिकेशन की प्रक्रिया भी पूरी करें।

यदि कोई करदाता 31 जुलाई की समय सीमा चूक जाता है, तो वह 31 दिसंबर 2026 तक बेलटेड रिटर्न दाखिल कर सकता है। हालांकि, आयकर अधिनियम की धारा 234F के तहत वार्षिक आय 5 लाख रुपये तक होने पर 1,000 रुपये और 5 लाख रुपये से अधिक होने पर 5,000 रुपये की लेट फीस देनी होगी। इसके अलावा यदि करदाता पर टैक्स बकाया है, तो धारा 234A के तहत हर महीने या उसके हिस्से पर 1 प्रतिशत ब्याज भी देना पड़ सकता है।

टैक्स विशेषज्ञ सीए अंशुल भार्गव का कहना है कि समय पर रिटर्न दाखिल नहीं करने वाले करदाताओं को कई कर लाभों का नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके अलावा कुछ मामलों में घाटे (Loss) को अगले वर्षों में कैरी फॉरवर्ड करने की सुविधा भी प्रभावित हो सकती है। यदि समय पर दाखिल किए गए रिटर्न में कोई गलती रह जाती है, तो उसे 31 मार्च तक संशोधित (Revised) रिटर्न के जरिए ठीक किया जा सकता है। वहीं निर्धारित शर्तों के तहत बाद में अपडेटेड रिटर्न दाखिल करने का विकल्प भी उपलब्ध रहता है।

टैक्स विशेषज्ञों की सलाह है कि जिन करदाताओं ने अभी तक आईटीआर दाखिल या ई-वेरिफाई नहीं किया है, वे बिना देरी किए 31 जुलाई से पहले यह प्रक्रिया पूरी कर लें। समय पर रिटर्न दाखिल करने से लेट फीस और ब्याज से बचाव होता है, रिफंड जल्दी मिलता है और करदाताओं को विभिन्न टैक्स लाभों का भी पूरा फायदा मिलता है।

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