दलमा से सटे गांवों में जंगली हाथियों का आतंक, दो वृद्ध महिलाएं घायल

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Chandil : दलमा वन्य प्राणी अभ्यारण्य से सटे ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र के गांवों में जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। ताजा मामला चांडिल प्रखंड के हिरमिली-दालग्राम गांव का है, जहां एक विशाल ट्रस्कर हाथी के घुस आने से ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। हाथी ने घर के बाहर सो रही दो वृद्ध महिलाओं को सूंड से उठाकर पटक दिया, हालांकि ग्रामीणों की सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया।

जानकारी के अनुसार, गर्मी के कारण करीब 70 और 75 वर्षीय दो महिलाएं घर के बाहर सो रही थीं। इसी दौरान गांव में घुसे हाथी ने दोनों को सूंड से उठाकर फेंक दिया। शोर सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और किसी तरह हाथी को वहां से भगाया।



ग्रामीणों ने बताया कि हाथी ने दालग्राम निवासी बुद्धेश्वर तंतूबाई की राशन दुकान की खिड़की तोड़ दी और अंदर रखा चावल व अन्य अनाज खा गया। इसके बाद वह धान के खेतों में घुस गया और फसल को भी नुकसान पहुंचाया।

काफी मशक्कत के बाद ग्रामीणों ने टॉर्च की रोशनी, पटाखों और शोरगुल के सहारे हाथी को गांव से बाहर खदेड़ा। लेकिन हाथी वहां से निकलकर चांडिल गोलचक्कर मुख्य सड़क और रेलवे ट्रैक पार करते हुए कदमडीह पहुंच गया, जहां वह सिंह जी के घर के आसपास करीब दो घंटे तक मंडराता रहा। इससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल बना रहा।


घटना के बाद ग्रामीणों में वन विभाग और जनप्रतिनिधियों के प्रति नाराजगी देखी गई। लोगों का कहना है कि दलमा अभ्यारण्य एशिया के सुरक्षित हाथी क्षेत्रों में गिना जाता है, इसके बावजूद हाथियों का लगातार गांवों में प्रवेश चिंता का विषय है।

ग्रामीणों ने ईचागढ़ विधायक के उस बयान पर भी आपत्ति जताई, जिसमें उन्होंने कहा था कि “हाथी को बांध कर थोड़े ही रखा जा सकता है, उसे जिधर खाना मिलेगा उधर जाएगा।” ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह के बयान समस्या के समाधान के बजाय लोगों की पीड़ा को नजरअंदाज करने जैसे हैं।

स्थानीय लोगों ने वन विभाग से गांवों में टॉर्च, पटाखा, सायरन और अन्य सुरक्षा संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि हाथियों के आतंक से ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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