Manoharpur : सेल की चिड़िया धोबिल माइंस में आयरन ओर की ट्रांसपोर्टिंग पिछले चार दिनों से पूरी तरह ठप है। स्थानीय ग्रामीण रोजगार की मांग को लेकर शुक्रवार से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। आंदोलनकारियों का स्पष्ट कहना है कि जब तक स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं दिया जाएगा, तब तक खदान से आयरन ओर का परिवहन शुरू नहीं होने दिया जाएगा।
धरने के कारण माइंस का ट्रांसपोर्टिंग कार्य पूरी तरह प्रभावित हो गया है, जिससे सेल के साथ-साथ नई ठेका कंपनी को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। क्षेत्र में इस बात की भी चर्चा है कि आंदोलन का संबंध पूर्व ठेका कंपनी से जोड़ा जा रहा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
जानकारी के अनुसार, पूर्व ठेका कंपनी लगभग 25 से 30 वर्षों तक चिड़िया धोबिल माइंस में रेजिंग एवं ट्रांसपोर्टिंग का कार्य करती रही। उस दौरान भी स्थानीय रोजगार को लेकर कई बार आंदोलन हुए, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सका।
करीब आठ से नौ माह तक खदान का संचालन बंद रहने के बाद नई ठेका कंपनी को एक वर्ष के लिए कार्य आवंटित किया गया। ट्रांसपोर्टिंग शुरू हुए अभी एक सप्ताह भी नहीं बीता था कि रोजगार की मांग को लेकर ग्रामीणों ने धरना शुरू कर दिया, जिससे एक बार फिर परिवहन कार्य रुक गया।

कांग्रेस नेता एवं मनोहरपुर प्रखंड अध्यक्ष सीताराम गोप ने कहा कि स्थानीय लोगों की रोजगार संबंधी मांग पूरी तरह उचित है। उन्होंने कहा कि सेल एक सार्वजनिक उपक्रम है, इसलिए ऐसा समाधान निकाला जाना चाहिए जिससे खदान का संचालन भी निर्बाध रूप से जारी रहे और स्थानीय युवाओं को रोजगार के पर्याप्त अवसर भी मिलें।









