Chandil : पड़ोसी जिला सरायकेला-खरसावां के चांडिल में स्थानीय लोगों के सामूहिक प्रयास और करीब 15 लाख रुपये की लागत से निर्मित एकमात्र मुक्तिधाम (श्मशान घाट) आज बदहाली का शिकार है। बामनी नदी के किनारे चांडिल डैम रोड पर स्थित इस मुक्तिधाम का उद्घाटन 29 अक्टूबर 2021 को विधायक सविता महतो ने किया था। हालांकि, देखरेख और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में अब इसकी स्थिति जर्जर होती जा रही है।
बारिश से मुक्तिधाम को हुआ भारी नुकसान
स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले वर्ष हुई मूसलाधार बारिश से मुक्तिधाम परिसर को काफी नुकसान पहुंचा। शव रखने वाले स्थान पर लगाए गए पेवर ब्लॉक उखड़ चुके हैं। वहीं परिसर में लगे स्ट्रीट लाइट के पोल भी गिर गए हैं। इसके कारण रात के समय अंतिम संस्कार के लिए पहुंचने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
मुक्तिधाम परिसर में स्थायी बिजली और पेयजल की व्यवस्था नहीं है। रात में अंतिम संस्कार के दौरान मृतक के परिजनों को अपने स्तर से जनरेटर या रोशनी की व्यवस्था करनी पड़ती है। परिसर में लगे नल भी लंबे समय से सूखे पड़े हैं।
असामाजिक तत्वों का अड्डा बनने की आशंका
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि रात के समय परिसर वीरान रहने के कारण यहां नशेड़ियों और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा बढ़ता जा रहा है। इससे अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है।
चांडिल बाजार निवासी मारवाड़ी समाज के संदीप सुल्तानिया और नवीन पसारी ने बताया कि बारिश के पानी के बहाव के कारण मुक्तिधाम जाने वाली पीसीसी सड़क के नीचे की मिट्टी बह गई है। इससे सड़क कई जगहों पर खोखली हो गई है और दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।
डीसी और एसडीओ को सौंपा जा चुका है ज्ञापन
श्री श्याम भटली परिवार चैरिटेबल ट्रस्ट, जमशेदपुर के अध्यक्ष राजेश पसारी समेत स्थानीय नागरिकों ने बताया कि मुक्तिधाम की बदहाल स्थिति को लेकर सरायकेला-खरसावां के उपायुक्त और चांडिल एसडीओ को कई बार ज्ञापन सौंपकर तत्काल मरम्मत की मांग की गई है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मुक्तिधाम में चारदीवारी, हाई मास्ट लाइट, शेड, स्थायी बिजली एवं पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।
नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत और रखरखाव की व्यवस्था नहीं की गई तो चांडिल का यह महत्वपूर्ण मुक्तिधाम पूरी तरह बर्बाद हो सकता है। अंतिम संस्कार जैसी संवेदनशील प्रक्रिया के लिए आने वाले लोगों को हो रही परेशानियों को देखते हुए जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को इस मामले में तत्काल पहल करनी चाहिए।

















