Guwa:मकर संक्रांति के पावन अवसर पर जगन्नाथपुर प्रखंड अंतर्गत झारखंड–ओडिशा सीमा पर स्थित बैतरणी नदी तट (रामेश्वर धाम/रामतीर्थ) में धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला। रामतीर्थ परिसर में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं संध्या महाआरती ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय वातावरण से सराबोर कर दिया।
इस पावन आयोजन में जगन्नाथपुर विधायक सह सत्तारूढ़ दल के उप मुख्य सचेतक श्री सोनाराम सिंकू, पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त सहित जिला प्रशासन के अधिकारी, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता मायाधर बेहरा एवं अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। प्रशासन और मंदिर समिति के समन्वय से मकर संक्रांति मेला शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित रूप से संपन्न हुआ।
सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ वैतरणी नदी में आस्था की डुबकी लगाने पहुंची। स्नान के उपरांत भक्तों ने रामेश्वर शिव मंदिर समेत अन्य मंदिरों में पूजा-अर्चना की। शाम होते ही माँ वैतरणी (आदि गंगा) के तट पर भव्य गंगा आरती का आयोजन हुआ, जो मेले का प्रमुख आकर्षण रहा। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को देर शाम तक बांधे रखा।
विधायक श्री सोनाराम सिंकू ने इस अवसर पर कहा कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीराम ने वनवास काल में वैतरणी नदी तट पर विश्राम किया था। यहीं उनके पदचिह्न एवं खड़ाऊं मिलने की मान्यता है तथा भगवान राम द्वारा स्थापित शिवलिंग के कारण इस स्थल पर रामेश्वर शिव मंदिर की स्थापना हुई। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि “शिव की भक्ति में ही शक्ति है, श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान शंकर की आराधना करें।”
रामतीर्थ धाम में एक ही परिसर में चार प्रमुख मंदिर स्थित हैं—
रामेश्वर शिव मंदिर (मुख्य आकर्षण)
सीताराम मंदिर
भगवान जगन्नाथ मंदिर
हनुमान मंदिर
मेले में झारखंड के सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां तथा ओडिशा के केन्दुझर, मयूरभंज और सुंदरगढ़ जिलों से लाखों श्रद्धालु पहुंचे। स्नान घाट, सीढ़ियां, महिला स्नानघर, विश्राम मंडप जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई थीं। प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनज़र श्रद्धालुओं से अपील की कि तेज धारा और असमान गहराई को देखते हुए केवल चिन्हित घाटों पर ही स्नान करें।
रामतीर्थ में मकर संक्रांति का यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सांस्कृतिक एकता और सामाजिक सौहार्द का भी संदेश दे गया।









