महंगे गिफ्ट नहीं, हाथों की मेहनत और दिल का प्यार… बहरागोड़ा की बेटी ने अनोखे अंदाज में मनाया मदर्स डे

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Bahragora : आज के दौर में जहां मदर्स डे महंगे गिफ्ट, ऑनलाइन सरप्राइज और सोशल मीडिया पोस्ट तक सिमटता जा रहा है, वहीं पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा से सामने आई एक छोटी-सी कहानी लोगों के दिलों को छू रही है।

यह कहानी है शिशु मंदिर विद्यालय में पढ़ने वाली नन्हीं बच्ची जयश्री महापात्रा की, जिसने यह साबित कर दिया कि मां के लिए सबसे कीमती तोहफा बाजार से खरीदा गया सामान नहीं, बल्कि अपने हाथों की मेहनत और दिल से दिया गया प्यार होता है।

जयश्री ने मदर्स डे को खास बनाने के लिए पूरे तीन महीने तक मेहनत कर अपने हाथों से एक सुंदर हैंडमेड ग्रीटिंग तैयार किया। खास बात यह रही कि उसने यह ग्रीटिंग किसी महंगे सामान या डिजिटल डिजाइन से नहीं, बल्कि आम के पेड़ के नीचे बैठकर अपनी कल्पना, रंगों और भावनाओं से सजाया।

मदर्स डे की सुबह जयश्री सबसे पहले उठी, स्नान कर पूजा-पाठ किया और फिर अपनी मां एवं नानी के पैर छूकर उन्हें “हैप्पी मदर्स डे” कहा। इसके बाद उसने अपने हाथों से बनाया हुआ ग्रीटिंग कार्ड प्रेम स्वरूप उन्हें भेंट किया।

जयश्री मासूम मुस्कान के साथ कहती है,
“आज लोग ऑनलाइन गिफ्ट और बाजार से खरीदे कार्ड देते हैं, लेकिन मुझे अपनी मां के लिए खुद कुछ बनाकर देने में सबसे ज्यादा खुशी मिलती है।”

उसकी यह छोटी-सी कोशिश पूरे परिवार के लिए भावुक पल बन गई। जयश्री की मां दीपाली महापात्रा बताती हैं कि इस बार मदर्स डे उनके परिवार की तीन पीढ़ियों — उनकी मां, वह स्वयं और उनकी बेटी — के लिए बेहद खास बन गया।

उन्होंने कहा कि परिवार ने एक साथ भगवान का आशीर्वाद लिया और मां की ममता, परिवार की खुशहाली एवं प्रेम की निरंतरता की कामना की।

गांव की इस सादगी भरी तस्वीर ने एक बड़ा संदेश दिया है —
“मां के लिए प्यार की कीमत बाजार तय नहीं करता… मां के चेहरे पर मुस्कान लाने वाली हर छोटी कोशिश ही दुनिया का सबसे बड़ा तोहफा बन जाती है।”

डिजिटल दौर में बहरागोड़ा की इस नन्हीं बच्ची ने यह एहसास कराया है कि रिश्तों की असली मिठास आज भी सादगी, संस्कार और अपनेपन में ही बसती है।

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