BIG BREAKING : झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, मृत भारी वाहन चालक के परिवार का मुआवजा ₹5.76 लाख से बढ़कर ₹18.30 लाख

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Jamshedpur : एक पीड़ित एवं वंचित परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए झारखंड उच्च न्यायालय ने मृत भारी वाहन चालक जहांगीर खान के परिवार को मिलने वाले मुआवजे की राशि में करीब 3.18 गुना वृद्धि की है। न्यायालय ने पूर्व निर्धारित ₹5.76 लाख के मुआवजे को बढ़ाकर ₹18.30 लाख कर दिया है। इसके साथ ही इस राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देने का निर्देश दिया गया है।

इस मामले में पीड़ित परिवार का पक्ष मजबूती से रखने के लिए जमशेदपुर निवासी युवा अधिवक्ता अनिकेत कुमार ओझा को उच्च न्यायालय द्वारा एमिकस क्यूरी (Amicus Curiae) नियुक्त किया गया था। वर्तमान में अधिवक्ता ओझा रांची हाईकोर्ट में वकालत कर रहे हैं।

क्या होता है एमिकस क्यूरी?

एमिकस क्यूरी का अर्थ ‘न्यायालय का मित्र’ (Friend of the Court) होता है। यह ऐसा व्यक्ति या अधिवक्ता होता है जो मामले में प्रत्यक्ष पक्षकार नहीं होता, लेकिन अदालत किसी जटिल, संवेदनशील अथवा महत्वपूर्ण मामले में निष्पक्ष कानूनी सहायता और विशेषज्ञ राय के लिए उसे नियुक्त कर सकती है। इसका उद्देश्य न्यायालय को मामले के तथ्यों और कानून के विभिन्न पहलुओं को समझने में सहायता करना होता है।

भारी वाहन चलाना कुशल कार्य : हाईकोर्ट

अधिवक्ता अनिकेत कुमार ओझा के अनुसार, M.A. No. 21 of 2014 में उच्च न्यायालय ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए भारी वाहन चालक के कार्य को कुशल (Skilled) कार्य माना। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि भारी वाहन चालक को अर्ध-कुशल (Semi-skilled) श्रमिक की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

मामले में MACT, पाकुड़ द्वारा वर्ष 2012 में मृतक चालक जहांगीर खान की मासिक आय ₹4,500 निर्धारित की गई थी। उच्च न्यायालय ने आय का पुनर्निर्धारण करते हुए इसे ₹10,000 प्रति माह माना। इसके साथ 40 प्रतिशत भविष्य की संभावनाएं (Future Prospects) जोड़ते हुए कुल मुआवजा राशि ₹18.30 लाख निर्धारित की गई।

बीमा कंपनी को छह सप्ताह में राशि जमा करने का निर्देश

न्यायालय ने National Insurance Company Ltd. को निर्देश दिया है कि वह बढ़ी हुई मुआवजा राशि ₹18.30 लाख तथा 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज की राशि निर्धारित अवधि में जमा करे। यह राशि छह सप्ताह के भीतर उच्च न्यायालय में जमा करने का निर्देश दिया गया है।

ब्याज की गणना दावा याचिका दायर किए जाने की तिथि 07 जनवरी 2012 से वास्तविक भुगतान/वसूली तक की जाएगी। हालांकि, अपील दायर करने में हुए 388 दिनों के विलंब को देखते हुए न्यायालय ने लगभग एक वर्ष की इस अवधि के ब्याज भुगतान से बीमा कंपनी को छूट प्रदान की है।

12 साल से न्याय की प्रतीक्षा कर रहा था परिवार

अधिवक्ता अनिकेत कुमार ओझा ने कहा कि उच्च न्यायालय द्वारा उन्हें एमिकस क्यूरी की जिम्मेदारी सौंपा जाना उनके लिए सम्मान और गर्व की बात है, लेकिन इसके साथ बड़ी कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी भी जुड़ी थी।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण पीड़ित परिवार पिछले करीब 12 वर्षों से अपने अधिकार के लिए संघर्ष कर रहा था। ऐसे में परिवार का पक्ष तथ्यों और कानूनी तर्कों के साथ पूरी निष्ठा से न्यायालय के समक्ष रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी थी।

उनके अनुसार, वर्ष 2014 में दायर अपील का अंतिम रूप से निस्तारण 28 अगस्त 2026 को झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एम. एस. सोनक द्वारा किया गया।

अधिवक्ता ओझा की हाईकोर्ट ने की सराहना

मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी अधिवक्ता अनिकेत कुमार ओझा की ओर से दी गई कानूनी सहायता की विशेष सराहना की गई। न्यायालय ने उनके द्वारा अपीलकर्ताओं का पक्ष निपुणता के साथ प्रस्तुत किए जाने का उल्लेख किया।

इसके अलावा न्यायालय ने झालसा को निर्देश दिया कि पैनल अधिवक्ताओं की निर्धारित अनुसूची के अनुसार अधिवक्ता ओझा को उनकी फीस का भुगतान किया जाए।

दावेदारों के बैंक खाते में पहुंचेगी मुआवजा राशि

न्यायालय ने एमिकस क्यूरी, झालसा तथा डालसा साहेबगंज को निर्देश दिया है कि वे दावेदार परिवार से व्यक्तिगत संपर्क कर मुआवजा राशि प्राप्त करने में आवश्यक सहायता करें। यह सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया है कि मुआवजा राशि सीधे दावेदारों के बैंक खाते में ट्रांसफर हो, ताकि किसी प्रकार के शोषण अथवा बिचौलिये की संभावना न रहे।

हाईकोर्ट के इस फैसले को लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे पीड़ित परिवार के लिए महत्वपूर्ण राहत के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, भारी वाहन चालकों के कार्य को कुशल श्रेणी में मानने संबंधी न्यायालय की टिप्पणी भी इस फैसले का एक महत्वपूर्ण पहलू है।

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