Jamshedpur : मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए नालसा (NALSA) की मानव-वन्यजीव संघर्ष योजना के तहत बुधवार को सरायकेला और कुचाई प्रखंड में जागरूकता शिविर आयोजित किए गए। शिविर का उद्देश्य ग्रामीणों को वन्यजीवों से होने वाले संघर्ष की रोकथाम, ऐसी परिस्थितियों में बरती जाने वाली सावधानियों तथा प्रभावित लोगों को उपलब्ध कानूनी सहायता और सरकारी प्रावधानों की जानकारी देना था।
शिविर में ग्रामीणों को बताया गया कि जंगली जानवरों के साथ सामना होने या संघर्ष की स्थिति में घबराने के बजाय सावधानी बरतना जरूरी है। विशेष रूप से सर्पदंश की घटनाओं में बिना समय गंवाए चिकित्सा सहायता लेने और संबंधित अधिकारियों को सूचना देने की अपील की गई। ग्रामीणों को वन्यजीवों से जुड़ी घटनाओं की जानकारी समय पर प्रशासन और संबंधित विभाग तक पहुंचाने के लिए भी जागरूक किया गया।
कार्यक्रम में बताया गया कि मानव-वन्यजीव संघर्ष में प्रभावित व्यक्तियों तथा घटना में मृत्यु होने की स्थिति में पात्र परिवार के सदस्यों को सरकार के लागू नियमों के तहत मुआवजा एवं अन्य अनुमन्य सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इसके साथ ही प्रभावित परिवारों को कानूनी सहायता प्राप्त करने के अधिकार और सरकारी राहत संबंधी प्रावधानों की जानकारी दी गई।
जागरूकता शिविर के दौरान ग्रामीणों से अपील की गई कि वन्यजीवों से संबंधित किसी भी घटना को हल्के में न लें। दुर्घटना या संघर्ष की स्थिति में तत्काल चिकित्सा सुविधा लेने के साथ प्रशासनिक स्तर पर भी सूचना दें, ताकि समय रहते आवश्यक सहायता और कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
कार्यक्रम में पैरा-लीगल वालंटियर्स (PLVs) तरामणी बांडिया और जोशना महतो समेत अन्य पीएलवी ने सक्रिय भागीदारी निभाई। उन्होंने ग्रामीणों के बीच जाकर मानव-वन्यजीव संघर्ष से बचाव, कानूनी अधिकारों और उपलब्ध सरकारी सहायता की जानकारी साझा की।
शिविर के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया गया कि जागरूकता और समय पर कार्रवाई से मानव-वन्यजीव संघर्ष से होने वाली जनहानि को कम किया जा सकता है। साथ ही प्रभावित परिवारों को उनके अधिकारों और उपलब्ध सहायता की जानकारी देकर उन्हें कानूनी एवं प्रशासनिक मदद तक पहुंचाने पर भी जोर दिया गया।

















