Chaibasa: सदर अस्पताल में पिछले एक महीने से हाथ जलने के कारण इलाजरत मंझारी प्रखंड के बिदरी पंचायत अंतर्गत पटाओते टोला निवासी अनाथ मनमोहन खंडाईत के लिए अब मदद की उम्मीद जगी है। आर्थिक तंगी और पारिवारिक संकट से जूझ रहे मनमोहन एवं उसके छोटे भाई की सहायता के लिए समाजसेवी और जिला प्रशासन आगे आए हैं।
जानकारी के अनुसार, मनमोहन के पिता का निधन उसके बचपन में ही हो गया था। कुछ समय बाद उसकी मां भी दोनों बच्चों को छोड़कर चली गई। तब से दोनों भाइयों का पालन-पोषण उनकी वृद्ध दादी कर रही हैं। परिवार की आजीविका दादी को मिलने वाली वृद्धावस्था पेंशन और राशन कार्ड से मिलने वाले अनाज पर निर्भर है। हाथ जलने के बाद से मनमोहन पिछले एक महीने से सदर अस्पताल में भर्ती है, जहां उसकी दादी लगातार उसकी देखभाल कर रही हैं।
परिवार की दयनीय स्थिति सोशल मीडिया क्रिएटर बोंगा लागुरी की फेसबुक पोस्ट के माध्यम से सामने आई। इसके बाद समाजसेवी जितेंद्र गोप ने मामले का संज्ञान लेते हुए पीएलबी रेणु देवी को इसकी जानकारी दी।
इसके बाद प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह डालसा अध्यक्ष मोहम्मद शाकिर तथा डालसा सचिव रवि चौधरी के मार्गदर्शन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डालसा) की टीम सदर अस्पताल पहुंची। टीम ने मनमोहन और उसकी दादी से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा हरसंभव कानूनी एवं सामाजिक सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया।
समाजसेवी जितेंद्र गोप ने बताया कि दोनों अनाथ भाइयों को समाज कल्याण विभाग की पालनकर्ता योजना से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। योजना के तहत दोनों बच्चों को चार-चार हजार रुपये प्रतिमाह आर्थिक सहायता दिलाने का प्रयास किया जाएगा, जिससे उनकी शिक्षा, भरण-पोषण और भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।
समाजसेवियों और डालसा की इस मानवीय पहल से परिवार को नई उम्मीद मिली है। स्थानीय लोगों ने भी इस प्रयास की सराहना करते हुए जरूरतमंद परिवार को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने की अपील की है।








