Jamshedpur : राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) एवं झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा) के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), पूर्वी सिंहभूम द्वारा चलाए जा रहे 90 दिवसीय जागरूकता अभियान के तहत शनिवार को बहरागोड़ा प्रखंड के सुदूरवर्ती क्षेत्र और उड़ीसा सीमा से सटे बनकटा पंचायत भवन तथा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, बहरागोड़ा में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
यह कार्यक्रम डालसा के अध्यक्ष सह प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार पांडेय के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। शिविर का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों एवं विभिन्न कल्याणकारी कानूनों की जानकारी देना था।

कार्यक्रम में डालसा सचिव कुमार सौरभ त्रिपाठी, लीगल एड डिफेंस काउंसिल के चीफ विदेश सिन्हा, सहायक सदस्य मनोज कुमार सिंह, विद्यालय की वार्डेन विनीता बिरुआ तथा डालसा के पीएलवी आनंद साव, नागेंद्र कुमार, दिलीप जायसवाल, राजेश प्रहराज, सम्पारानी पारीक, अनुराग साव, यामिनी सिंह, बलिराम हेंब्रम, सुदामा रजक, बनकटा पंचायत के मुखिया सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
जागरूकता शिविर में वक्ताओं ने नागरिकों के मौलिक अधिकार एवं कर्तव्यों, जिला विधिक सेवा प्राधिकार के कार्यों और उद्देश्यों की विस्तृत जानकारी दी। इसके साथ ही बाल विवाह, बाल श्रम, डायन प्रथा, घरेलू हिंसा, पॉक्सो एक्ट, नशा उन्मूलन, बाल संरक्षण (चाइल्ड प्रोटेक्शन) और मानव तस्करी (ह्यूमन ट्रैफिकिंग) जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर लोगों को जागरूक किया गया।
वक्ताओं ने कहा कि समाज के वंचित, पीड़ित और जरूरतमंद वर्गों को उनके अधिकारों की जानकारी देकर विकास की मुख्यधारा से जोड़ना आवश्यक है। इसके लिए कानूनी जागरूकता एक महत्वपूर्ण माध्यम है, जिससे लोग अपने अधिकारों के प्रति सजग होकर न्याय प्राप्त कर सकते हैं और अपने जीवन स्तर में सुधार ला सकते हैं।
कार्यक्रम में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की बड़ी संख्या में छात्राएं शामिल हुईं। छात्राओं ने विभिन्न कानूनी विषयों पर जानकारी प्राप्त की और अपने अधिकारों एवं सुरक्षा संबंधी कानूनों के बारे में जागरूकता हासिल की।
डालसा के अधिकारियों ने बताया कि 90 दिवसीय अभियान के तहत जिले के दूर-दराज क्षेत्रों में लगातार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि कानूनी सहायता और अधिकारों की जानकारी समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाई जा सके।









