Chandil : 14 जून 2019 की वह भयावह शाम आज भी कुकड़ू और आसपास के क्षेत्र के लोगों के जेहन में ताजा है। सरायकेला-खरसावां जिले के तिरुलडीह थाना क्षेत्र अंतर्गत कुकड़ू साप्ताहिक हाट में हुए नक्सली हमले को सात वर्ष पूरे हो गए हैं, लेकिन उस दिन की दर्दनाक यादें आज भी लोगों को झकझोर देती हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, उस दिन शुक्रवार की शाम कुकड़ू हाट में सामान्य दिनों की तरह चहल-पहल थी। दूर-दराज के गांवों से आए लोग खरीदारी में व्यस्त थे। इसी दौरान गश्ती कर लौटे तिरुलडीह थाना के कुछ पुलिसकर्मी हाट के समीप एक दुकान में कोल्ड ड्रिंक पी रहे थे, जबकि कुछ जवान आसपास तैनात थे।
अचानक घात लगाए बैठे नक्सलियों ने पुलिसकर्मियों पर हमला बोल दिया। पहले धारदार हथियारों से वार किया गया और उसके बाद जवानों के हथियार लूटकर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी गई। देखते ही देखते पूरा बाजार गोलियों की आवाज से दहल उठा और अफरा-तफरी मच गई।
इस हमले में एएसआई गोवर्धन पासवान, एएसआई मनोधन हांसदा, आरक्षी धनेश्वर महतो, आरक्षी डिब्रू पूर्ति तथा आरक्षी युधिष्ठिर मलुवा ने कर्तव्य निर्वहन के दौरान सर्वोच्च बलिदान दिया। उनकी शहादत को आज भी क्षेत्र के लोग गर्व और सम्मान के साथ याद करते हैं।

घटना के बाद क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठे थे। सबसे बड़ा सवाल कुकड़ू थाना भवन को लेकर है। घटनास्थल से करीब 500 मीटर की दूरी पर वर्ष 2016 में थाना भवन का निर्माण पूरा हो चुका था, लेकिन सात वर्ष बाद भी वहां से नियमित पुलिस व्यवस्था शुरू नहीं हो पाई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते थाना संचालित हो जाता, तो क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत हो सकती थी। आज भी ग्रामीण थाना संचालन की मांग उठा रहे हैं।
शहादत दिवस के अवसर पर तिरुलडीह थाना परिसर में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान पुलिस अधिकारियों, जवानों एवं स्थानीय लोगों ने शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उपस्थित लोगों ने उनके अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान को याद करते हुए नमन किया।
सात वर्षों के दौरान सरकारें बदलीं, अधिकारी बदले और कई घोषणाएं भी हुईं, लेकिन कुकड़ू थाना संचालन का मुद्दा अब भी अधूरा है। हर वर्ष 14 जून को क्षेत्रवासी शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, लेकिन साथ ही यह सवाल भी उठाते हैं कि आखिर पांच वीर जवानों की शहादत के बाद भी कुकड़ू थाना से पुलिस व्यवस्था शुरू क्यों नहीं हो सकी। शहीदों की स्मृति के साथ यह सवाल आज भी क्षेत्रवासियों के मन में अनुत्तरित बना हुआ है।








