Kumaradungi School Issues : शिक्षा व्यवस्था को लेकर कुमारडुंगी में विधानसभा स्तरीय धरना, RTE लागू करने की उठी मांग

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Chaibasa : कुमारडुंगी प्रखंड कार्यालय के समीप गुरुवार को शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर बाल अधिकार सुरक्षा मंच पश्चिम सिंहभूम के तत्वावधान में विधानसभा स्तरीय धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया।

इस आंदोलन में मझगांव विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कुमारडुंगी, मंझारी, तांतनगर, मझगांव और हाटगम्हरिया प्रखंडों के विभिन्न पंचायतों से मंच के सदस्य, जनप्रतिनिधि, मानकी-मुंडा, अभिभावक एवं स्थानीय लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए।

कार्यक्रम की शुरुआत रैली के साथ हुई। अलग-अलग प्रखंडों से लोग रैली निकालते हुए धरना स्थल पहुंचे, जहां सभा का आयोजन किया गया।

धरना को संबोधित करते हुए विभिन्न वक्ताओं—घनश्याम जेराई, मनोज हेम्ब्रम, निर्मल बिरुवा, सुभाष चंद्र आल्डा, डॉ. दिनेश चंद्र बोयपाई, हारीण तामसोय समेत अन्य ने जिले की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए।

वक्ताओं ने बताया कि पश्चिम सिंहभूम में शिक्षा की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। विधानसभा क्षेत्र के 113 विद्यालय मात्र एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं। भौगोलिक कठिनाइयों के कारण बच्चों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके चलते कई बच्चे आठवीं के बाद पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हैं।

उन्होंने मांग की कि प्रत्येक उच्च विद्यालय में छात्रावास का निर्माण हो, स्कूलों में चारदीवारी बनाई जाए, तथा पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। जानकारी दी गई कि करीब 30% स्कूलों में शौचालय नहीं है और 25% स्कूलों में पेयजल की सुविधा उपलब्ध नहीं है।



प्रदर्शनकारियों ने 16 सूत्री मांगों के साथ मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन प्रखंड विकास पदाधिकारी को सौंपा। प्रमुख मांगों में RTE 2009 के मानकों के अनुसार शिक्षकों की तत्काल नियुक्ति, रसोइयों का नियमितीकरण, हर पंचायत में उच्च विद्यालय की स्थापना, स्मार्ट क्लास व स्मार्ट बोर्ड की व्यवस्था, स्कूलों तक पक्की सड़क, जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा की पढ़ाई, सुरक्षा गार्ड की नियुक्ति और ITI कॉलेज की स्थापना शामिल हैं।

इसके अलावा DMFT कोष का उपयोग शिक्षा और स्वास्थ्य पर करने, उर्दू शिक्षकों की बहाली, स्कूलों में खेल मैदान और पाकशाला निर्माण जैसी मांगें भी प्रमुख रूप से उठाई गईं।

धरना-प्रदर्शन के माध्यम से ग्रामीणों और अभिभावकों ने स्पष्ट संदेश दिया कि यदि शिक्षा व्यवस्था में जल्द सुधार नहीं किया गया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

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