हुरलुंग गाँव में टुसु बिदाई का भव्य आयोजन, धान की देवी को विदाई देते हुए उमड़ा जनसैलाब

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Hurlung:आज पुस सांकराइत के दिन हुरलुंग गाँव में देसुआ आदिवासी कुड़मि समाज की महिलाओं के नेतृत्व में टुसु बिदाई सह शोभा यात्रा का आयोजन भव्यता के साथ संपन्न हुआ। महिला संयोजक समिति की संयोजक नंदिनी महतो पुनुरिआर के नेतृत्व में हजारों ग्रामीणों ने इस पारंपरिक उत्सव में भाग लिया।
गाँव व आसपास के सभी महिला पुरुष, बच्चे-बच्चियां अगहन सांकराइत को थापना कर धान रूपी अन्न महाशक्ति टुसु माञ को चउड़ल में रखकर पारंपरिक ढोल-मांदर, गाजे-बाजे और नाच-गाने के साथ लुपुंगडीह स्वर्णरेखा नदी के आदिप्राचीन लड़कंदा टुसू घाट तक ले गए। वहां टुसु माञ को बहते पानी में विदाई दी गई, और अगले बरस फिर खुशियाँ लेकर आने की कामना की गई।
मुख्य संयोजक प्रसेनजीत महतो ने बताया कि टुसु परब का मूल संबंध धान रूपी अन्न महाशक्ति से है। बच्चियां इस परब के सम्मान में पूरे पुस मास हर शाम एक-एक फूल देकर टुसु पाता करती हैं। इसी कारण इसे पुस परब भी कहा जाता है। मकर संक्रांति के साथ जुड़ने के कारण कालांतर में इसे मकर परब भी कहा जाने लगा। यह परब कुड़मालि संस्कृति का अंतिम परब माना जाता है, जिसे फसल कटनी के बाद खुशी के साथ मनाया जाता है।
इस अवसर पर मुख्य रूप से देसुआ आकुस केंद्रीय सदस्य रामबिलास महतो, चुड़ामन महतो, झारखंड प्रदेश संयोजक प्रकाश महतो केटिआर, बिना पानी महतो, नमिता महतो, संजय महतो, उदित महतो, सूरज महतो, सुजीत महतो, विक्की महतो, अमित महतो, जुगल सिंह मुंडा समेत सैकड़ों महिला-पुरुष उपस्थित थे।
इस सांस्कृतिक परंपरा ने दर्शकों और प्रतिभागियों दोनों को आनंद और उत्साह से भर दिया। नए कपड़े, पिठा-पकवान और टुसु गीत-नाच ने इस पर्व को और भी रंगीन और जीवंत बना दिया।

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