Seraikela:मकर संक्रांति के पावन अवसर पर सरायकेला शहर में आस्था और श्रद्धा का अद्भुत नजारा देखने को मिला। अहले सुबह से ही शहर के विभिन्न नदी तटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। ठंड की परवाह किए बिना लोग स्वर्णरेखा, खरकई समेत अन्य घाटों पर पहुंचे और आस्था की डुबकी लगाई।
सुबह होते ही घाटों पर “हर-हर सूर्य देव” और “जय गंगा मैया” के जयघोष गूंजने लगे। स्नान के पश्चात श्रद्धालुओं ने भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इसके बाद दान-पुण्य का सिलसिला चला, जहां जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और तिल-गुड़ का दान किया गया।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन किया गया स्नान और दान विशेष पुण्यदायी माना जाता है। यही कारण है कि हर वर्ष इस दिन बड़ी संख्या में लोग नदी तटों पर पहुंचते हैं। बुजुर्गों से लेकर युवा और बच्चे तक इस पर्व में पूरे उत्साह के साथ शामिल दिखे।
घाटों पर सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर स्थानीय प्रशासन भी मुस्तैद नजर आया। कुल मिलाकर मकर संक्रांति का यह पर्व सरायकेला में श्रद्धा, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक बनकर सामने आया।









