संथाली भाषा–ओलचिकी लिपि के शताब्दी समारोह में राष्ट्रपति की ऐतिहासिक भागीदारी तय

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Jamshedpur:संथाली भाषा और ओलचिकी लिपि के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। 29 नवंबर को करनडीह स्थित दिशोम जाहेर, जमशेदपुर में आयोजित 22वें संथाली “पारसी महा” एवं ओलचिकी लिपि के शताब्दी समारोह में देश की महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का आगमन प्रस्तावित है। राष्ट्रपति इस ऐतिहासिक आयोजन में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करेंगी।
ओलचिकी लिपि के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित यह समारोह संथाली भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है। राष्ट्रपति की उपस्थिति से यह आयोजन न केवल झारखंड बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी विशेष महत्व प्राप्त करेगा।
राष्ट्रपति के प्रस्तावित दौरे को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में शुक्रवार को पोटका विधानसभा क्षेत्र के विधायक संजीव सरदार ने कार्यक्रम स्थल दिशोम जाहेर का दौरा किया। उन्होंने आयोजन समिति के सदस्यों के साथ बैठक कर कार्यक्रम की रूपरेखा, सुरक्षा व्यवस्था, अतिथि प्रबंधन और आयोजन की व्यापक तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की।
विधायक संजीव सरदार ने कहा कि,
“संथाली भाषा और ओलचिकी लिपि हमारे समाज की आत्मा हैं। राष्ट्रपति का इस ऐतिहासिक समारोह में शामिल होना पूरे संथाली समाज और झारखंड के लिए गर्व का क्षण है। इससे हमारी भाषा और संस्कृति को राष्ट्रीय पहचान और सम्मान मिलेगा।”
बैठक के दौरान आयोजन समिति के सदस्य रविंद्रनाथ मुर्मू, वीर प्रताप मुर्मू, गणेश टुडू, शंकर हेंब्रम, कुशल हांसदा, बाबूलाल, जोबा मुर्मू, मानसिंह मांझी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने समारोह को भव्य और ऐतिहासिक बनाने के लिए सामूहिक प्रयास का संकल्प लिया।

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