Jamshedpur:विरासत में जड़े, उद्यम में अग्रसर की थीम के साथ कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) द्वारा आयोजित झारखंड ट्राइबल एंटरप्रेन्योरशिप समिट ने राज्य में जनजातीय उद्यमिता को नई दिशा देने का मजबूत संदेश दिया। पूर्वी भारत के जनजातीय उद्यमी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, नीति-निर्माता और वित्तीय संस्थानों की व्यापक भागीदारी के बीच यह समिट ज्ञान-विनिमय और अवसरों का एक प्रभावी मंच बनकर उभरा।
कार्यक्रम का मुख्य फोकस वित्त, बाजार, कौशल और तकनीक जैसे महत्वपूर्ण घटकों तक जनजातीय उद्यमियों की पहुँच बढ़ाना रहा। समिट ने इस बात को दोहराया कि जनजातीय समुदाय क्षेत्रीय आर्थिक परिवर्तन के प्रमुख हिस्सेदार हैं और उनकी उद्यमशीलता क्षमता को एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र की जरूरत है।
सीआईआई झारखंड स्टेट काउंसिल के पूर्व चेयरमैन तथा हाईको इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर तापस साहू ने कहा कि “झारखंड की समृद्ध जनजातीय संस्कृति में अनगिनत उद्यम संभावनाएं छिपी हैं, लेकिन सरकारी योजनाओं की जानकारी, वित्तीय साक्षरता और बाजार तक पहुंच की कमी अभी भी चुनौतियां बनी हुई हैं। यह समिट इन चुनौतियों को दूर करने की दिशा में सार्थक कदम है।”
उन्होंने बताया कि CII ने 200 जनजातीय उद्यमियों की प्रोफाइल पर आधारित विशेष डायरेक्टरी जारी की है, जिससे उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर पहचान और उद्योग व निवेशकों से जुड़ाव मिलेगा।
वहीं झारखंड सरकार में श्रम, रोजगार, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग के सचिव आईएएस जितेंद्र कुमार सिंह ने कहा— “जनजातीय उद्यमी राष्ट्र की GDP में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं। राज्य की 26% जनजातीय आबादी विभिन्न कारोबारी गतिविधियों में संलग्न है। समावेशी विकास हमारी प्राथमिकता है।”
उन्होंने राज्य के मजबूत स्किल इंफ्रास्ट्रक्चर का उल्लेख करते हुए बताया कि झारखंड में 171 ITI, 781 अतिरिक्त ITI, 333 PPP केंद्र, 6 CSR समर्थित संस्थान और 260 से अधिक निजी ITI संचालित हैं। बदलती उद्योग जरूरतों के अनुरूप कोर्स अपडेट किए जा रहे हैं, जिससे युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़े।









