Jamshedpur : केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार नए श्रम संहिताओं को लेकर जिला असंगठित कामगार एवं कर्मचारी कांग्रेस की ओर से कदमा के प्रकृति विहार में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष अंजनी पांडेय ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में झारखंड प्रदेश कामगार कांग्रेस के अध्यक्ष सह झारखंड गीग एंड प्लेटफार्म वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष शैलेश पांडेय उपस्थित थे।
मुख्य अतिथि शैलेश पांडेय ने चार नए लेबर कोड को पूंजीपतियों के संरक्षण में बनाए गए कानून बताते हुए कहा कि ये प्रावधान मजदूर वर्ग के अधिकारों पर सीधा और गंभीर प्रहार हैं। उन्होंने कहा कि “मोदी सरकार ने मजदूरों को छलने का काम किया है। लंबे संघर्षों के बाद हासिल श्रम अधिकारों को एक झटके में खत्म कर दिया गया है। नए लेबर कोड मजदूरों के हक को छिन्न-भिन्न कर देंगे।”
जिलाध्यक्ष अंजनी पांडेय ने कहा कि चारों श्रम संहिताओं की जड़ में ‘हायर एंड फायर’ की नीति छिपी है, जिसके तहत मालिकों को मनमर्जी से नियुक्ति और छंटनी का अधिकार मिल जाएगा। काम के घंटे, अवकाश व्यवस्था और अन्य श्रम मानकों में व्यापक बदलाव मजदूरों के लिए हानिकारक सिद्ध होंगे। ठेका प्रथा को वैधता मिल जाएगी, वहीं ट्रेनी के नाम पर बिना वेतन मजदूरी की राह भी खुलेगी।
उन्होंने कहा कि इन संहिताओं के लागू होने से यूनियन बनाना कठिन हो जाएगा, श्रम न्यायालय लगभग अप्रभावी हो जाएंगे और श्रम अधिकारियों की भूमिका महज़ सलाहकार तक सीमित रह जाएगी। इससे असंगठित क्षेत्र के लाखों मजदूर और भी असुरक्षित हो जाएंगे।
बैठक में निर्णय लिया गया कि इस श्रम-विरोधी नीति के खिलाफ जल्द ही जिला मुख्यालय में जोरदार प्रदर्शन किया जाएगा और केंद्र सरकार पर इन कानूनों को वापस लेने और संशोधित करने का दबाव बनाया जाएगा। बैठक में मुख्य रूप से राकेश गुप्ता, मनीष चंद्रवंशी, रवि राज, अजित सिंह, महेश यादव सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे।









