नो-एंट्री लागू करने की मांग पर चाईबासा में टकराव — ग्रामीणों और प्रशासन के बीच बढ़ा विवाद, भाजपा ने की न्यायिक जांच की मांग

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Adityapur : चाईबासा में नो-एंट्री लागू करने की मांग को लेकर ग्रामीणों और जिला प्रशासन के बीच टकराव गहराता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि भारी वाहनों की आवाजाही से सड़क दुर्घटनाओं में लगातार वृद्धि हो रही है। उनका दावा है कि पिछले एक वर्ष में 155 लोगों की मौत सड़क हादसों में हुई है।

वहीं, जिला प्रशासन ने ग्रामीणों के दावे को खारिज करते हुए बताया कि जनवरी 2024 से अक्टूबर 2025 तक कुल 76 मौतें सड़क दुर्घटनाओं में दर्ज की गई हैं। प्रशासन का तर्क है कि नो-एंट्री नियम पहले लोगों की सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए लागू किया गया था, लेकिन बाद में कुछ स्थानीय विरोधों के कारण अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया।

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन और सरकार अवैध खनन सिंडिकेट के दबाव में हैं, जिसके चलते नो-एंट्री लागू नहीं की जा रही। उनका कहना है कि रात के समय भारी वाहनों की निरंतर आवाजाही से गांवों में भय और असुरक्षा का माहौल है।

इस बीच, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस पूरे मामले की न्यायिक जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार अवैध खनन सिंडिकेट के साथ मिली हुई है। मरांडी ने कहा कि ग्रामीण शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांग रख रहे थे, लेकिन पुलिस प्रशासन ने उन पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागकर कार्रवाई की, जो निंदनीय है।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन और ग्रामीणों के बीच चल रहे इस गतिरोध का समाधान कैसे निकलता है और क्या राज्य सरकार इस विवादास्पद मुद्दे पर ठोस कदम उठाती है या नहीं।

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