सुरक्षित वातावरण में ही संभव है बच्चों का सम्पूर्ण विकास : यूनिसेफ़ विशेषज्ञ प्रीति श्रीवास्तव

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Manoharpur:आनंदपुर प्रखंड के बेडाकेंदुदा पंचायत सभागार में गुरुवार को “परिवार आधारित बच्चों की देखभाल एवं समुदाय स्तर पर पालन-पोषण परिवार” विषय पर एक दिवसीय बाल संरक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया।
यह कार्यक्रम जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त के निर्देशानुसार बाल संरक्षण सहायता कार्यालय और समेकित जन विकास के संयुक्त तत्वावधान में यूनिसेफ के सहयोग से संपन्न हुआ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी श्रीमती पुनीता तिवारी ने की, जबकि राँची यूनिसेफ़ की विशेषज्ञ श्रीमती प्रीति श्रीवास्तव ने दीप प्रज्वलन कर कार्यशाला का शुभारंभ किया।
मुख्य अतिथि के रूप में जिला परिषद सदस्य विजय भेंगरा, मुखिया अनिल नायक, बाल संरक्षण देखभाल अधिकारी डॉ. कृष्णा कुमार तिवारी, पीसीआई राँची की अंकिता कशिश, और संस्था के हेड फादर वीरेंद्र टेटे उपस्थित रहे।

“बाल विवाह रोकना सबकी जिम्मेदारी” — प्रीति श्रीवास्तव

कार्यशाला में यूनिसेफ की विशेषज्ञ प्रीति श्रीवास्तव ने कहा कि बच्चों के सम्पूर्ण विकास के लिए उन्हें सुरक्षित और भावनात्मक रूप से सशक्त वातावरण की आवश्यकता होती है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि बाल विवाह की जानकारी मिलने पर तुरंत संबंधित अधिकारी या चाइल्डलाइन 1098 पर सूचित करें।
प्रीति ने कहा —

“कम उम्र में विवाह कर देना अपराध की श्रेणी में आता है। यह न सिर्फ कानूनन गलत है बल्कि इससे बच्चों का मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास बाधित होता है।”


उन्होंने बाल तस्करी, पॉक्सो एक्ट 2012, फोस्टर केयर, पालन-पोषण देखभाल, और सुरक्षित-असुरक्षित परिवेश पर भी विस्तृत जानकारी दी।

सरकार चला रही वैकल्पिक देखभाल योजनाएँ — डॉ. कृष्णा कुमार तिवारी

बाल संरक्षण अधिकारी डॉ. कृष्णा कुमार तिवारी ने बताया कि राज्य सरकार “समुदाय आधारित बच्चों का वैकल्पिक देखभाल कार्यक्रम” के तहत स्पॉन्सरशिप, फोस्टर केयर और आफ्टर केयर जैसी योजनाएँ चला रही है।
इन योजनाओं के तहत जरूरतमंद बच्चों को ₹4000 प्रति माह की सहायता दी जाती है, यदि परिवार की वार्षिक आय ₹75,000 से कम हो।



“बाल विवाह समाज के लिए कलंक” — बेनिडिकता एक्का

संस्था संचालक बेनिडिकता एक्का ने कहा कि

“कम उम्र में शादी कर देना बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। इससे कुपोषण, मातृ मृत्यु दर और सामाजिक पिछड़ापन बढ़ता है।”



फिया फाउंडेशन के संजय सोरेंग ने भी कहा कि शिक्षा और सुरक्षा के माध्यम से ही इन कुरीतियों का अंत किया जा सकता है।


“कानून नहीं, जागरूकता ही समाधान है” — पुनीता तिवारी

कार्यक्रम की अध्यक्ष पुनीता तिवारी ने कहा कि
“बाल विवाह और बाल तस्करी को खत्म करने में समाज के हर वर्ग की भूमिका जरूरी है। यह सिर्फ कानून से नहीं, सामुदायिक जागरूकता से संभव है।”



उन्होंने जनप्रतिनिधियों और मीडिया से अपील की कि वे ग्राम सभाओं में इस मुद्दे को उठाएँ और सरकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने में सहयोग दें।



ग्रामीणों ने लिया संकल्प

अंत में संस्था के फादर वीरेंद्र टेटे ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।
कार्यक्रम में मुखिया, मुंडा, ग्रामीण समुदाय, एनजीओ प्रतिनिधि, चाइल्ड हेल्पलाइन के अधिकारी, प्रखंड कर्मी और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
सभी ने बाल विवाह, बाल तस्करी और बाल श्रम मुक्त समाज बनाने का संकल्प लिया।

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