स्वर्णरेखा परियोजना में दो दशकों से जड़ें जमाए भ्रष्टाचार पर मानवाधिकार संगठन का बड़ा खुलासा, मुख्यमंत्री को सौंपा गया विस्फोटक ज्ञापन

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Ranchi : झारखंड की बहुचर्चित स्वर्णरेखा बहुद्देशीय परियोजना एक बार फिर भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते सुर्खियों में है। झारखंड ह्यूमन राइट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश कुमार शर्मा उर्फ कीनू ने मुख्यमंत्री को एक विस्तृत और गंभीर आरोपों से भरा ज्ञापन सौंपते हुए परियोजना में जारी दलाली, पद के दुरुपयोग और विस्थापित विरोधी रवैए पर कड़ी आपत्ति जताई है।

ज्ञापन में परियोजना कार्यालय में पिछले 20 वर्षों से तैनात टंकक प्रोसेनजीत घोष की भूमिका को लेकर अनेक विस्फोटक आरोप लगाए गए हैं। दिनेश शर्मा के अनुसार, सेवा शर्तों के अनुसार एक ही कार्यालय में अधिकतम 3 वर्ष की सेवा सीमा निर्धारित है, लेकिन घोष को प्रशासनिक लापरवाही और राजनीतिक संरक्षण का लाभ मिल रहा है, जिससे वे दो दशक से बिना रुकावट एक ही पद पर बने हुए हैं।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि प्रोसेनजीत घोष ने ईचागढ़ की विधायक सविता महतो के लैटर पैड का दुरुपयोग करते हुए स्वयं के पक्ष में प्रशंसा पत्र तैयार कराया और उसे परियोजना के प्रशासक तक पहुँचाया। इतना ही नहीं, जिला परिषद सदस्य ज्योति लाल मांझी और एक राजनीतिक दल से भी इसी तरह के पत्र जारी करवाने के आरोप लगाए गए हैं।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि घोष पर विस्थापितों के अधिकारों को कुचलने, मुआवजा प्रक्रिया को जानबूझकर जटिल बनाने और दलालों के नेटवर्क को संचालित करने का आरोप है, जिससे आम जनता को मुआवजा पाने के लिए बिचौलियों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।

ज्ञापन में इस बात का भी खुलासा किया गया कि मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा पूर्व में ही घोष की प्रतिनियुक्ति रद्द कर स्थानांतरण का आदेश जारी हो चुका है, परंतु वह आदेश अब तक लागू नहीं हो पाया है, जिससे राजनीतिक हस्तक्षेप की आशंका गहराई है। ज्ञापन में यह चिंताजनक आरोप भी दर्ज है कि घोष की कथित असामाजिक तत्वों से मिलीभगत है, और उन्होंने कुछ विस्थापितों को जान-माल की क्षति पहुंचाने की साजिश रची है।

दिनेश शर्मा ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और परियोजना में व्याप्त भ्रष्टाचार, लापरवाही और विस्थापितों के प्रति अमानवीय व्यवहार पर तत्काल अंकुश लगाया जाए।

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