भोगनाडीह में शहीद वंशजों पर लाठीचार्ज शर्मनाक, सरकार करे कार्रवाई: आदिवासी सुरक्षा परिषद

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Jamshedpur : भोगनाडीह (साहिबगंज) में हूल दिवस के अवसर पर वीर शहीद सिदो-कान्हू के वंशजों पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज की घटना ने पूरे झारखंड को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना की तीखी प्रतिक्रिया देते हुए आदिवासी सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष रमेश हांसदा ने इसे झारखंड के इतिहास का काला अध्याय करार दिया है।

रमेश हांसदा ने सोमवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर घटना की कड़ी निंदा की और कहा कि जिन वीरों के बलिदान से संथाल परगना और समूचे झारखंड को पहचान मिली, उनके वंशजों को ही श्रद्धांजलि देने से रोकना और फिर लाठीचार्ज करना न केवल निंदनीय है, बल्कि यह आदिवासी समाज के आत्म-सम्मान पर सीधा प्रहार है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब शहीद परिवार ही अपनी श्रद्धा व्यक्त नहीं कर सकते, तो फिर हूल दिवस मनाने का औचित्य क्या रह जाता है?”

सरकार की मानसिकता पर उठे सवाल

आदिवासी सुरक्षा परिषद ने कहा कि यह घटना राज्य सरकार की जनविरोधी और आदिवासी विरोधी मानसिकता को उजागर करती है। परिषद ने मुख्यमंत्री से उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए दोषी अधिकारियों के विरुद्ध तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की है। अगर सरकार कार्रवाई नहीं करती है तो यह मान लिया जाएगा कि यह सब उसकी शह पर हुआ,” परिषद ने दो टूक चेतावनी दी।

जन आंदोलन की चेतावनी

परिषद ने घोषणा की कि 1 जुलाई को पूर्वी सिंहभूम जिला मुख्यालय में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। यदि इसके बाद भी सरकार मौन रही, तो आगे राज्यव्यापी आंदोलन और हड़ताल की रणनीति तैयार की जाएगी।

राजनीतिक दलों की चुप्पी पर सवाल

रमेश हांसदा ने झारखंड मुक्ति मोर्चा समेत सभी राजनीतिक दलों से इस मामले में स्पष्ट प्रतिक्रिया देने की अपील की है। उन्होंने कहा अगर राजनीतिक प्रतिनिधि भी चुप रहेंगे, तो जनता उन्हें आगामी चुनाव में सबक सिखाने से पीछे नहीं हटेगी।

यह घटना सिर्फ एक पुलिसिया कार्रवाई नहीं, बल्कि पूरे आदिवासी समाज की आत्मा को चोट पहुंचाने वाली है। संथाल समुदाय की क्रांतिकारी परंपरा को सरकार को हल्के में नहीं लेना चाहिए।

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