एयर इंडिया विमान हादसे में 241 की मौत, लेकिन चमत्कारिक रूप से बचे रमेश विश्वासकुमार — सीट 11A की कहानी

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अहमदाबाद : भारत के विमानन इतिहास का एक दर्दनाक और अविस्मरणीय हादसा तब सामने आया जब अहमदाबाद के सरदार वल्लभ भाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट से लंदन के लिए उड़ान भरने वाला एयर इंडिया का विमान टेक-ऑफ के कुछ ही मिनट बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में कुल 242 लोग सवार थे, जिनमें से 241 की मौके पर ही मौत हो गई। लेकिन इस भीषण हादसे में एक चमत्कारिक जीवन रक्षा की कहानी भी सामने आई — सीट 11A के यात्री रमेश विश्वासकुमार की।

केवल 0.000001% बचने की संभावना, फिर भी बच गए रमेश
हादसे के बाद जब बचाव दल मौके पर पहुँचा, तब मलबे के ढेर में हर तरफ़ धुआं, आग और विनाश का मंजर था। लेकिन उसी क्षण बचावकर्मियों को सीट 11A के आसपास कुछ हलचल नजर आई। मलबे के नीचे से रमेश विश्वासकुमार जीवित निकले। विशेषज्ञों के अनुसार, इतने बड़े विमान हादसे में किसी व्यक्ति का बचना लगभग असंभव था। सांख्यिकीय दृष्टि से उनकी बचने की संभावना 0.000001% आंकी गई थी।

कैसे बचे रमेश?
रमेश विश्वासकुमार अहमदाबाद निवासी हैं और एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में डेटा एनालिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। वे व्यापारिक दौरे पर लंदन जा रहे थे। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, टेकऑफ के बाद इंजन में आग लगने के कारण विमान अनियंत्रित होकर बी.जे. मेडिकल कॉलेज के पास गिर गया। हादसे के समय रमेश सीट बेल्ट बांधकर पूरी सावधानी से बैठे थे। उनके ऊपर का हिस्सा एक बड़े मलबे के हिस्से से इस प्रकार ढका रहा कि सीधा दबाव उन पर नहीं पड़ा और इसने उनके शरीर को गंभीर चोटों से बचा लिया।

ईश्वर का चमत्कार मानते हैं रमेश
अस्पताल में उपचाराधीन रमेश विश्वासकुमार ने पत्रकारों से बातचीत में कहा —
“मुझे खुद विश्वास नहीं हो रहा कि मैं आज जीवित हूं। सब कुछ पलक झपकते ही खत्म हो गया था। मलबे के नीचे से सिर्फ प्रार्थना कर रहा था। शायद मेरे लिए ऊपर वाले की मर्जी थी कि मैं बचूं। जाको राखे साइयां, मार सके ना कोई।”

रमेश की हिम्मत और होशियारी बनी सहारा
डॉक्टरों का कहना है कि रमेश ने हादसे के बाद भी धैर्य और होशियारी बनाए रखी। वह धीरे-धीरे सांस ले रहे थे और खुद को हिलाने की कोशिश नहीं कर रहे थे ताकि ऑक्सीजन की खपत कम हो। यही सतर्कता भी उनके बचाव में सहायक बनी।

हादसे की जांच जारी
विमान हादसे के बाद केंद्र सरकार ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। प्रारंभिक जांच में तकनीकी खराबी, ईंधन लीकेज और पायलट की आपातकालीन प्रतिक्रिया सभी बिंदुओं पर जांच चल रही है।

पूरा देश इस हादसे में मारे गए 241 लोगों के प्रति शोक व्यक्त कर रहा है। लेकिन रमेश विश्वासकुमार की यह चमत्कारिक बचाव की कहानी मानो जीवन, आशा और ईश्वर की शक्ति का संदेश बन गई है।

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