विधायक संजीव सरदार के प्रयास से ठेका मजदूरों को मिला अर्जित अवकाश का हक, संघर्ष की जीत का जश्न

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Jamshedpur : यूसिल नरवा पहाड़ स्थित स्टेट ऑफिस परिसर में बुधवार का दिन मजदूरों के संघर्ष की ऐतिहासिक जीत का साक्षी बना। झारखंड ठेका मजदूर यूनियन के बैनर तले आयोजित आभार समारोह में अर्जित अवकाश (Earned Leave) लागू होने की खुशी में मजदूरों ने अपनी एकजुटता और संघर्ष का उत्सव मनाया। यह अधिकार मजदूरों को करीब दो वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद प्राप्त हुआ है।

विधायक संजीव सरदार की महत्वपूर्ण भूमिका

कार्यक्रम में पोटका विधायक संजीव सरदार विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। मजदूरों की मांगों को सरकार व यूसिल प्रबंधन तक पहुंचाने में उनकी भूमिका अहम रही। उन्होंने लगातार प्रबंधन व उच्चाधिकारियों से संवाद कर मजदूरों को उनका अधिकार दिलाने में मदद की। समारोह के दौरान मजदूरों ने विधायक को पारंपरिक शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया और उनके प्रयासों के प्रति आभार व्यक्त किया।

दो वर्षों के संघर्ष का फल

झारखंड ठेका मजदूर यूनियन के अध्यक्ष सुधीर सोरेन ने जानकारी दी कि अर्जित अवकाश की यह मांग वर्षों पुरानी थी। लंबे समय तक चली त्रिपक्षीय वार्ताओं के बाद 19 जनवरी 2024 को इस पर सहमति बनी, लेकिन लागू नहीं किया गया। अंततः विधायक संजीव सरदार के हस्तक्षेप से प्रबंधन ने अप्रैल 2025 से इसे लागू करने का आश्वासन दिया और 9 जून 2025 से मजदूरों के खातों में अर्जित अवकाश की राशि ट्रांसफर की जानी शुरू हो गई।

मजदूरों के हक की यह जीत संघर्ष और एकता का परिणाम : संजीव सरदार

सभा को संबोधित करते हुए विधायक संजीव सरदार ने कहा, “यह जीत मजदूरों की एकता और धैर्यपूर्ण संघर्ष की जीत है। जब आंदोलन संयमित और संगठित होता है तो कोई ताकत उसे रोक नहीं सकती। हेमंत सरकार मजदूरों और गरीबों की सरकार है।” उन्होंने मजदूरों को आश्वस्त किया कि उनकी अन्य मांगें भी प्राथमिकता के साथ सरकार तक पहुंचाई जा रही हैं। उन्होंने यूसिल प्रबंधन से जल्द ही मेडिकल सुविधा की भी मांग पूरी करने का भरोसा जताया।

संघर्ष के प्रतीक बने मजदूर, आगे भी जारी रहेगा आंदोलन

कार्यक्रम में सैकड़ों मजदूरों ने भाग लिया। मजदूर नेताओं में सुधीर सोरेन के साथ सोमाई किस्कू, गुड्डू दास सहित कई नेता उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि इस संघर्ष ने साबित कर दिया है कि अधिकार केवल एकजुट होकर लड़ने से ही मिलते हैं। आगे भी मजदूर हितों के लिए सामूहिक संघर्ष जारी रहेगा।

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