पारंपरिक पहचान को संजोने की पहल: झामुमो द्वारा हरहरघुटू कोल बस्ती में साड़ी वितरण कार्यक्रम सम्पन्न

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महिलाओं में वितरित की गई पारंपरिक वस्त्र, संस्कृति संरक्षण का दिया संदेश

जमशेदपुर, 25 मई 2025: आज झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) परिवार की ओर से जमशेदपुर प्रखंड अंतर्गत हरहरघुटू कोल बस्ती में एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के अंतर्गत आदिवासी हो समाज की माता-बहनों के बीच पारंपरिक वस्त्र – साड़ी – का वितरण किया गया। यह पहल झामुमो द्वारा अपनी सांस्कृतिक जड़ों को संजोने और समाज को उसकी परंपराओं से जोड़ने के उद्देश्य से की गई।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित झामुमो के वरिष्ठ नेता महाबीर मुर्मू ने महिलाओं को साड़ी वितरित की और उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा, “आज के इस आधुनिक युग में हम धीरे-धीरे अपनी संस्कृति और परंपरा को भूलते जा रहे हैं, जिससे हमारी पहचान संकट में पड़ रही है। यही कारण है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा की ओर से गांव-गांव में पारंपरिक वस्त्र और वाद्ययंत्रों का वितरण कर लोगों को अपनी संस्कृति से जोड़े रखने का प्रयास किया जा रहा है।”

उन्होंने यह भी कहा कि पारंपरिक वस्त्र सिर्फ एक परिधान नहीं, बल्कि हमारे समाज की पहचान और आत्मगौरव का प्रतीक हैं। इस प्रकार के आयोजन से समाज के सभी वर्गों, विशेषकर युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत को जानने और अपनाने का अवसर मिलेगा।

समाज की एकता और जागरूकता का संदेश
कार्यक्रम में झामुमो प्रखंड सचिव जगत मार्डी, नेता गोल्डी तिवारी, दल गोविंद लोहरा, मनोज तांती, विष्णु नाग, कुना लगुरी, सन्तान लगुरी, ललिता गागराई, अजय दास, राजेश लगुरी, मंगल लगुरी सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग मौजूद रहे। सभी ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायी कदम बताया।

महिलाओं ने व्यक्त की प्रसन्नता
कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं ने झामुमो के इस प्रयास की सराहना की और कहा कि ऐसे आयोजनों से उन्हें सम्मान और अपनी सांस्कृतिक पहचान को पुनः महसूस करने का अवसर मिला है। विशेषकर पारंपरिक परिधान पाकर सभी के चेहरे खिल उठे।

संस्कृति संरक्षण के साथ सामाजिक सहयोग
यह आयोजन न केवल एक वस्त्र वितरण कार्यक्रम था, बल्कि इसके माध्यम से समाज के अंदर आपसी भाईचारे, सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक सहयोग की भावना को भी सशक्त किया गया। यह संदेश दिया गया कि यदि हम अपनी जड़ों से जुड़े रहें तो कोई भी बाहरी प्रभाव हमें हमारी पहचान से वंचित नहीं कर सकता।

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