शिक्षा के भविष्य पर मंथन को तैयार एमबीएनएस संस्थान, 30 अप्रैल को राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन

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जमशेदपुर/चांडिल।
तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में शिक्षा की दिशा और दशा को लेकर अब एमबीएनएस ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स बड़ा मंथन करने जा रहा है। “21वीं सदी में शिक्षा: चुनौतियाँ एवं अवसर” विषय पर एक एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 30 अप्रैल (बुधवार) को संस्था के चांडिल स्थित आसनबनी परिसर (NH-33) में किया जाएगा। यह शैक्षणिक महाकुंभ सुबह 11:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक चलेगा, जिसमें देशभर से कई प्रतिष्ठित शिक्षा-विद्, कुलपति, शोधार्थी एवं छात्र शामिल होंगे।

राष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठी में जुटेंगे शैक्षणिक दिग्गज
कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक डॉ. अंजिला गुप्ता (कुलपति, कोल्हान विश्वविद्यालय) एवं संरक्षक डॉ. परशुराम सियाल (कुलसचिव, कोल्हान विश्वविद्यालय) होंगे। मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. बंशी गोपाल सिंह (कुलपति, पं. सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय, बिलासपुर) उपस्थित रहेंगे।
विशिष्ट अतिथि होंगे डॉ. प्रभात कुमार पाणि (कुलपति, नेताजी सुभाष विश्वविद्यालय, जमशेदपुर)। वहीं मुख्य वक्ता के तौर पर डॉ. राजीव कुमार मल्लिक (डीन, मानविकी, बीएन मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा एवं पूर्व प्रो-वाइस चांसलर, पटना विश्वविद्यालय) अपने विचार साझा करेंगे।



एनईपी, डिजिटल शिक्षा से लेकर मानसिक स्वास्थ्य तक होंगे केंद्र में विषय
संगोष्ठी में नई शिक्षा नीति (NEP 2020), तकनीकी नवाचार, शहरी-ग्रामीण शिक्षा में सेतु निर्माण, डिजिटल लर्निंग, शिक्षक प्रशिक्षण, मानसिक स्वास्थ्य, और सतत विकास हेतु शिक्षा जैसे समसामयिक मुद्दों पर गंभीर चर्चा की जाएगी। यह मंच शोधार्थियों, शिक्षकों और छात्रों के लिए विचारों के आदान-प्रदान का एक सशक्त अवसर प्रदान करेगा।

प्रकाशित होंगे चयनित शोध-पत्र
संगोष्ठी में प्रस्तुत चयनित शोध-पत्रों को ISBN युक्त पुस्तक में प्रकाशित किया जाएगा। ये शोध पत्र हिंदी या अंग्रेजी दोनों भाषाओं में स्वीकार किए जा रहे हैं, जिससे अधिक से अधिक प्रतिभागी जुड़ सकें।

गुणवत्ता शिक्षा की मिसाल बना एमबीएनएस संस्थान
वर्ष 2010 से संचालित एमबीएनएस ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स आज नर्सिंग, फार्मेसी, शिक्षा, डिप्लोमा, जनसंचार, प्रबंधन और वाणिज्य के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का प्रतीक बन चुका है। IQAC और सेमिनार समिति द्वारा आयोजित यह संगोष्ठी शिक्षा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव की दिशा में एक प्रेरक पहल मानी जा रही है।

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