पहलगाम में हिंदू श्रद्धालुओं की लक्षित हत्या – राष्ट्र के सम्मान पर गहरा प्रहार: काले

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जमशेदपुर : 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भयावह आतंकी हमले ने न केवल निर्दोष हिंदू श्रद्धालुओं की जान ली, बल्कि पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। इस हमले को लेकर सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर आक्रोश चरम पर है। सामाजिक कार्यकर्ता और चिंतक काले ने इस घटना को “हिंदू विरोधी धार्मिक नरसंहार” बताते हुए इसे राष्ट्र की आत्मा पर हमला करार दिया है।

काले ने एक तीखा बयान जारी करते हुए कहा, “यह महज आतंकवाद नहीं, यह सुनियोजित, संगठित और लक्षित नरसंहार है – एक ऐसा पाप, जिसमें सैलानियों से नाम और धर्म पूछकर, उनके परिवार के सामने ही उन्हें गोलियों से छलनी कर दिया गया।” उन्होंने इसे हमारे राष्ट्र के सम्मान और स्वाभिमान के खिलाफ एक सीधा हमला बताया।

काले ने आगे कहा कि जब देश कश्मीर में अमन, शांति और पर्यटन की वापसी के लिए प्रयासरत है, ऐसे में इस तरह की घटनाएं आतंक के आकाओं की घृणित मानसिकता और साज़िश को उजागर करती हैं। “ये हमले कश्मीर की शांति और भारत की एकता को चोट पहुँचाने की कोशिश हैं। ये हमले पूरे भारत को यह याद दिलाते हैं कि आतंकवाद के खिलाफ अब और अधिक निर्णायक रवैया अपनाने का समय आ गया है।”



उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से अपील की कि “ऐसे नरभक्षी आतंकियों और उनके समर्थन में खड़े हर व्यक्ति को कठोरतम सजा दी जाए, ताकि दुनिया को यह संदेश जाए कि भारत अपने नागरिकों की हत्या पर अब चुप नहीं रहेगा।”

काले ने इस अमानवीय घटना में मारे गए श्रद्धालुओं को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा, “उनकी शहादत केवल एक परिवार की नहीं, यह पूरे देश की पीड़ा है। अब समय आ गया है कि हम न केवल आतंकवाद को जड़ से उखाड़ें, बल्कि उसे समर्थन देने वालों का भी सामाजिक और कानूनी बहिष्कार करें।”

अंत में उन्होंने दो टूक कहा – “भारत अब चुप नहीं रहेगा। हर आतंकी और उसके पोषक को मुँहतोड़ जवाब मिलेगा। कश्मीर भारत का था, है और रहेगा – और वहां एक बार फिर अमन का सूरज उगेगा।”

देश भर में इस घटना को लेकर गुस्सा और शोक का माहौल है, वहीं आमजन से लेकर राजनेता तक अब ठोस और निर्णायक कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।

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