पूर्व छात्र नेता जाकिर अली की मौत की निष्पक्ष जांच की मांग

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Jamshedpur: मानगो के पुरुलिया रोड निवासी एवं पूर्व छात्र नेता जाकिर अली की हाल में हुई मौत को लेकर परिजनों और परिचितों ने निष्पक्ष एवं गहन जांच की मांग की है। मामले को प्रथम दृष्टया आत्महत्या से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन मृतक के करीबियों ने घटना की परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए वरीय पुलिस अधीक्षक को आवेदन देकर सभी संभावित पहलुओं की वैज्ञानिक एवं फॉरेंसिक तरीके से जांच कराने का आग्रह किया है।

आवेदनकर्ताओं के अनुसार, करीब एक सप्ताह पूर्व मानगो के लक्ष्मण नगर के समीप एक व्यक्ति के नदी में डूबने अथवा शव मिलने की सूचना सामने आई थी। बताया गया कि नदी के बहाव में शव मोहरदा क्षेत्र की ओर चला गया और बाद में बिरसानगर थाना क्षेत्र में बरामद किया गया। पुलिस की प्रारंभिक जांच में घटना को आत्महत्या से जोड़कर देखा जा रहा है।

हालांकि, परिवार और जाकिर अली को लंबे समय से जानने वाले लोगों ने उनकी तैराकी क्षमता का हवाला देते हुए घटना की परिस्थितियों की विस्तृत जांच की मांग की है। आवेदन में कहा गया है कि जाकिर अली अच्छे तैराक थे और छुट्टियों के दौरान डिमना लेक में लंबे समय तक तैरने की क्षमता रखते थे। ऐसे में उनकी मौत से जुड़े घटनाक्रम की सभी कड़ियों की जांच जरूरी है।


आवेदन में कुछ मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए शव पर आंख और चेहरे के आसपास चोट अथवा जख्म के निशान होने की बात कही गई है। हालांकि, इन दावों की वास्तविक स्थिति पोस्टमार्टम और चिकित्सकीय रिपोर्ट से ही स्पष्ट हो सकेगी।

परिजनों एवं परिचितों ने मांग की है कि यदि पोस्टमार्टम के दौरान शरीर पर किसी प्रकार के चोट के निशान पाए गए हैं, तो उनकी प्रकृति, कारण और समय की फॉरेंसिक जांच कराई जाए। साथ ही पोस्टमार्टम, विसरा एवं अन्य चिकित्सकीय रिपोर्टों की विस्तृत समीक्षा की जाए।


एसएसपी को दिए आवेदन में जाकिर अली के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), चैट, मैसेज और अंतिम संपर्कों की नियमानुसार जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही यह पता लगाने का आग्रह किया गया है कि घटना से पहले वह किन लोगों के संपर्क में थे और अंतिम बार किससे बातचीत हुई थी।

आवेदनकर्ताओं का कहना है कि मौत से पहले की गतिविधियों की समय-रेखा तैयार करने से घटना की परिस्थितियों को समझने में मदद मिल सकती है। इसके लिए मृतक की अंतिम लोकेशन, आने-जाने के रास्ते और संपर्क में रहे लोगों से पूछताछ की मांग भी की गई है।


परिजनों ने जाकिर अली के ऑटो अथवा वाहन की तकनीकी एवं फॉरेंसिक जांच कराने का भी आग्रह किया है। साथ ही यह पता लगाने की मांग की गई है कि वह अंतिम बार वाहन लेकर कहां गए थे और उस दौरान उनके साथ कौन-कौन लोग थे।

घटना स्थल और आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने की मांग भी की गई है। आवेदनकर्ताओं के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज से मृतक की अंतिम गतिविधियों, आने-जाने के मार्ग और संभावित संपर्कों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।


शिकायतकर्ताओं ने कथित घटनास्थल और जहां से शव बरामद हुआ, दोनों स्थानों का बारीकी से निरीक्षण कराने की मांग की है। जरूरत पड़ने पर फॉरेंसिक टीम की मदद लेने का भी आग्रह किया गया है।

उन्होंने नदी के बहाव, शव मिलने के स्थान और संभावित घटनास्थल के बीच की दूरी तथा अन्य परिस्थितियों की भी जांच कराने की मांग की है, ताकि घटनाक्रम की वास्तविक कड़ी सामने आ सके।


परिजनों और परिचितों ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप लगाना नहीं है। वे केवल जाकिर अली की मौत की वास्तविक वजह सामने लाने और परिवार को न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं।

उनका कहना है कि यदि जांच में आत्महत्या की पुष्टि होती है तो भी निष्कर्ष वैज्ञानिक साक्ष्यों और सभी परिस्थितियों की समीक्षा के आधार पर सामने आना चाहिए। वहीं, जांच के दौरान यदि कोई संदिग्ध परिस्थिति या आपराधिक संलिप्तता सामने आती है तो उसके अनुसार विधिसम्मत कार्रवाई की जाए।

अब परिजनों और परिचितों की नजर पुलिस जांच पर है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक जांच, मोबाइल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होने वाली जांच से ही जाकिर अली की मौत की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।

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