जमशेदपुर। टाटानगर रेलवे हॉस्पिटल, जो लंबे समय से रेलवे कर्मचारियों और रिटायर्ड स्टाफ का भरोसेमंद इलाज केंद्र माना जाता रहा है, इन दिनों विवादों में घिर गया है। हाल ही में नियुक्त डॉक्टर गौमासा गौतमी पर मरीजों के साथ दुर्व्यवहार और अस्पताल व्यवस्था की अनदेखी करने के आरोप लगे हैं।
मरीजों और रिटायर्ड कर्मचारियों का आरोप
रिटायर्ड कर्मचारियों और उनके परिजनों का कहना है कि डॉक्टर ओपीडी में तेज आवाज में बात करती हैं और कई बार मरीजों को बाहर से दवा खरीदने के लिए मजबूर करती हैं।
एक परिजन ने कहा –
“अस्पताल में दवा की कमी प्रबंधन की जिम्मेदारी है, लेकिन डॉक्टर का यह कहना कि बाहर से दवा खरीदो, बेहद कष्टदायक है। हमने रेलवे में पूरी जिंदगी दी है, इलाज के समय ऐसा व्यवहार अपमानजनक लगता है।”
रेस्ट हाउस में रहने पर सवाल
डॉक्टर पर यह भी आरोप है कि वे पिछले एक साल से कंस्ट्रक्शन विभाग के रेस्ट हाउस में रह रही हैं, जबकि नियम के अनुसार एक हफ्ते के भीतर उन्हें रेलवे क्वार्टर मिल जाना चाहिए था। चर्चा यह भी है कि डिप्टी चीफ इंजीनियर एस.के. सौरभ की अनुमति से अवैध तरीके से रेस्ट हाउस में रह रही हैं।
पहले भी रहे विवाद
सूत्रों के मुताबिक, टाटानगर अस्पताल ज्वाइन करने से पहले डॉक्टर गौतमी दो महीने तक अनधिकृत छुट्टी पर थीं और उस दौरान उन पर विभागीय कार्रवाई हुई थी।
डॉक्टर और इंजीनियर का पक्ष
आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉक्टर गौमासा गौतमी ने कहा –
“सभी आरोप निराधार हैं। मैंने कभी किसी मरीज से दुर्व्यवहार नहीं किया। मेरा पहला कर्तव्य इलाज करना है और मैं अपने दायित्व निभा रही हूं।”
इसी तरह, डिप्टी चीफ इंजीनियर एस.के. सौरभ ने भी आरोपों को खारिज करते हुए कहा –
“मुझे इस मामले की कोई जानकारी नहीं है। इस पर मैं टिप्पणी नहीं करूंगा।”
रिटायर्ड कर्मचारियों की मांग
एक रिटायर्ड लोको पायलट ने कहा –
“हमने रेलवे को 35 साल दिए। अब इलाज के लिए इसी हॉस्पिटल पर निर्भर हैं। लेकिन अगर यहां भी हमें सम्मान नहीं मिलेगा तो हम कहां जाएंगे? हमारी मांग है कि रेलवे प्रशासन जांच करे और डॉक्टरों का व्यवहार मरीजों के प्रति सहयोगी बनाए।”
जांच की मांग और अस्पताल की छवि पर असर
लगातार विवादों से रेलवे हॉस्पिटल की छवि पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर कर्मचारियों और परिजनों ने रेलवे प्रशासन से निष्पक्ष जांच और बेहतर सेवा सुनिश्चित करने की मांग की है।









