अपनी रीढ़ का रखें ख्याल — क्योंकि यह हमेशा आपका ख्याल रखती है

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विशेषज्ञ मार्गदर्शन : डॉ. जीवेश मलिक, हेड कंसल्टेंट एवं एचओडी, न्यूरोसर्जरी विभाग
डॉ. नीरज कुमार चौधरी, सीनियर कंसल्टेंट, न्यूरोसर्जरी विभाग, टाटा मेन हॉस्पिटल।

आज की तेज़ रफ्तार जीवनशैली में पीठ दर्द सबसे आम स्वास्थ्य समस्याओं में से एक बन चुका है। लंबे समय तक डेस्क पर बैठना, लगातार खड़े रहना या भारी शारीरिक काम करना — हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन चुके ये व्यवहार रीढ़ की सेहत पर गहरा असर डालते हैं।

रीढ़ (स्पाइन) शरीर की गतिशीलता और सही मुद्रा का आधार है। यह हड्डियों, डिस्क, लिगामेंट्स और मांसपेशियों के जटिल संतुलन से बनी होती है। गलत बैठने की मुद्रा, निष्क्रिय जीवनशैली, अधिक वजन या अचानक भारी कार्य इस संतुलन को बिगाड़ सकते हैं, जिससे दर्द, अकड़न और गतिशीलता में कमी जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।

हालांकि अधिकांश पीठ दर्द अस्थायी होते हैं, लेकिन लगातार रहने वाला दर्द कभी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। यह डिस्क की कमजोरी, नसों पर दबाव या अन्य गंभीर रीढ़-संबंधी विकारों का संकेत हो सकता है।



टाटा मेन हॉस्पिटल में रीढ़ की उन्नत चिकित्सा सुविधाएं

टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच) में रीढ़ संबंधी समस्याओं के निदान, रोकथाम और उपचार के लिए अत्याधुनिक तकनीकें और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम मौजूद है।

इनमें से एक प्रमुख तकनीक है मिनिमली इनवेसिव स्पाइन सर्जरी (MISS) — एक आधुनिक विधि जिसमें छोटे चीरे और सटीक उपकरणों के माध्यम से सर्जरी की जाती है। इससे मरीजों को कम दर्द, न्यूनतम रक्तस्राव और तेज़ रिकवरी का लाभ मिलता है। इस तकनीक के जरिए अधिकांश मरीज कुछ ही दिनों में सामान्य जीवन में लौट आते हैं।


रोकथाम सबसे प्रभावी उपाय

रीढ़ को स्वस्थ बनाए रखना काफी हद तक हमारी जीवनशैली पर निर्भर करता है। विशेषज्ञों के अनुसार:

सही बैठने और खड़े होने की मुद्रा बनाए रखें।

लंबे समय तक एक ही स्थिति में न रहें — नियमित अंतराल पर ब्रेक लेकर स्ट्रेचिंग करें।

कोर मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए हल्के व्यायाम अपनाएं।

वस्तुओं को झुककर नहीं, घुटनों के सहारे उठाएं।

शरीर का वजन संतुलित रखें और पौष्टिक आहार लें।


कई उद्योगों में अब कर्मचारियों के लिए एर्गोनॉमिक प्रशिक्षण और रीढ़ सुरक्षा सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि कार्यस्थल पर चोट या तनाव से बचा जा सके।

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