‘साझी शहादत, साझी विरासत’ से मजबूत होगी देश की एकता: आनंद मोहन सिंह

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Jamshedpur : माइकल जॉन ऑडिटोरियम में सोमवार को सर्वोदय समिति के तत्वावधान में ‘साझी शहादत, साझी विरासत’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर की गई। इस अवसर पर अतिथियों को शॉल, बुके, स्मृति चिह्न एवं थैला देकर सम्मानित किया गया। सर्वोदय समिति की ओर से सामाजिक सरोकार से जुड़े वरिष्ठ लोगों को भी शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि एवं पूर्व सांसद आनंद मोहन सिंह ने कहा कि देश आज एक चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि समाज में घृणा, नफरत और विद्वेष के जरिए लोगों को बांटने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि ‘साझी शहादत, साझी विरासत’ बेहद गंभीर विषय है, क्योंकि देश की आजादी में सभी धर्म और जाति के लोगों ने मिलकर कुर्बानी दी थी।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान किसी की जाति या धर्म नहीं पूछा गया, बल्कि सभी ने देश की आजादी के लिए मिलकर संघर्ष किया। यही देश की साझी शहादत और साझी विरासत है। उन्होंने कहा कि लोगों की पहचान मंदिर या मस्जिद, भाषा अथवा जाति से नहीं, बल्कि इस मिट्टी और देश से है।

आनंद मोहन सिंह ने कहा कि देश की सामाजिक एकता को कमजोर करने वाली सोच से बचने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत की खूबसूरती इसकी विविधता और आपसी सहयोग की परंपरा में रही है। उन्होंने झारखंड के गठन को भी अपने संबोधन में उठाते हुए कहा कि उनकी दृष्टि में वृहद झारखंड की अवधारणा पूरी नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि ओडिशा, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और बिहार के आदिवासी क्षेत्रों को शामिल करते हुए वृहद झारखंड की कल्पना की गई थी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।

‘साझी सियासत और साझी संस्कृति पर भी हो चर्चा’

उत्तर प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने कहा कि जमशेदपुर की धरती पर ‘साझी शहादत, साझी विरासत’ के साथ ‘साझी सियासत और साझी संस्कृति’ जैसे विषयों पर भी चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जमशेदपुर सिर्फ लोहे के कारखाने के लिए नहीं, बल्कि विभिन्न समुदायों के लोगों की एकता, मेहनत और खून-पसीने से विकसित शहर के रूप में भी पहचान रखता है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने वाली ऐसी संगोष्ठियों की आवश्यकता महसूस की जा रही है। उनके अनुसार, समाज को जोड़ने और विखराव की स्थिति को रोकने के लिए वैचारिक स्तर पर लगातार संवाद जरूरी है।

झारखंड प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा कि देश जिस परिस्थिति से गुजर रहा है, उसमें ‘साझी शहादत, साझी विरासत’ जैसे विषयों पर संगोष्ठी आयोजित करने की जरूरत महसूस हो रही है। उन्होंने कहा कि देश के पूर्वजों ने जो शहादत दी, उसकी विरासत को सुरक्षित रखना समाज की जिम्मेदारी है।

उन्होंने महात्मा गांधी और नाथूराम गोडसे को लेकर वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक विमर्श पर भी अपनी बात रखी और कहा कि परिस्थितियों को देखते हुए ‘साझी शहादत, साझी विरासत’ के साथ ‘साझी सियासत’ को भी चर्चा का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

अरविंद कुमार सिंह के संबोधन पर तालियां

ईचागढ़ के पूर्व विधायक अरविंद कुमार सिंह ने अपने संबोधन में देश की वर्तमान परिस्थितियों और समकालीन सामाजिक-राजनीतिक स्थिति पर विस्तार से विचार रखे। उनके संबोधन के दौरान सभागार में मौजूद लोगों ने तालियों के साथ कई बातों का समर्थन किया।

सर्वोदय समिति के महासचिव मनोज कुमार सिंह ने मंच संचालन किया। स्वागताध्यक्ष महेन्द्र मिश्र ने स्वागत भाषण दिया, जबकि समिति के अध्यक्ष रियाजउद्दीन खान ने अध्यक्षीय संबोधन में ‘साझी शहादत, साझी विरासत’ के महत्व पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम के मंच पर आनंद मोहन सिंह, अजय कुमार लल्लू, प्रदीप कुमार बालमुचू, अरविंद कुमार सिंह, शहजादा अनवर, रवींद्र सिंह, राकेश्वर पाण्डेय, विजय खान, मनोज आनंद, अंकुर सिंह, परविंदर सिंह, आरके सिंह, अशोक चौधरी, राजेश ठाकुर, उदय कुमार सिंह और रईस रिजवी छब्बन समेत अन्य उपस्थित रहे। अंत में कोषाध्यक्ष राणा सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

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