सरायकेला में ठेका श्रम कानून की खुलेआम अनदेखी, बिना लाइसेंस चल रहे दर्जनों कार्यस्थल

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Adityapur : सरायकेला जिले में औद्योगिक और विकासशील गतिविधियों के बीच ठेका श्रम (विनियमन एवं उन्मूलन) अधिनियम 1970 के नियमों की खुलेआम अनदेखी सामने आ रही है। आरोप है कि निकाय क्षेत्र में कई ठेकेदार 20 से अधिक नहीं, बल्कि 100 से भी अधिक मजदूरों से कार्य करा रहे हैं, लेकिन उनके पास वैध श्रम लाइसेंस मौजूद नहीं है।

कानून के अनुसार, अधिनियम की धारा 12 के तहत यदि कोई ठेकेदार 20 या उससे अधिक श्रमिकों को नियोजित करता है तो उसके लिए श्रम लाइसेंस लेना अनिवार्य है। झारखंड में राज्य संशोधनों के तहत प्रावधानों में कुछ भिन्नता हो सकती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कई साइटों पर बड़े पैमाने पर मजदूर कार्यरत हैं और ठेकेदार नियमों की अनदेखी कर रहे हैं।

मजदूरों का आरोप है कि बिना लाइसेंस काम कराने के कारण उन्हें सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी नहीं दी जाती। न ही ईपीएफ (EPF), ईएसआई (ESI) और न ही ओवरटाइम का भुगतान किया जाता है। अधिकांश मामलों में 10 से 12 घंटे तक काम कराया जा रहा है।

सबसे गंभीर स्थिति दुर्घटना के समय उत्पन्न होती है, जब बिना वैध रिकॉर्ड और पंजीकरण के मजदूर किसी हादसे का शिकार होता है। ऐसी स्थिति में उसे कर्मचारी राज्य बीमा या मुआवजा अधिनियम के तहत मिलने वाले लाभ नहीं मिल पाते और कई बार ठेकेदार जिम्मेदारी से बच निकलते हैं।

जानकारी के अनुसार, कई ठेकेदार आयकर रिटर्न तो दाखिल करते हैं, लेकिन श्रमिकों के वैधानिक पंजीकरण और लाइसेंसिंग प्रक्रिया से बचते हैं, जिससे श्रमिक अधिकारों का उल्लंघन लगातार जारी है।

1970 में बनाए गए इस कानून का उद्देश्य ठेका श्रमिकों के शोषण को रोकना था, लेकिन सरायकेला में 2026 में भी इसके अनुपालन पर सवाल उठ रहे हैं। यहां नियमों की अनदेखी न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि श्रमिकों की सुरक्षा और भविष्य पर भी गंभीर संकट पैदा कर रही है।

स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि प्रशासन कब इस ओर सख्त कार्रवाई करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कदम, लाइसेंस रद्द करने और दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी, तब तक श्रमिकों के शोषण पर रोक लगाना मुश्किल होगा।

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