Jamshedpur : नरवा पहाड़ यूरेनियम प्रोजेक्ट में वेतन भुगतान को लेकर चल रही ठेका मजदूरों की हड़ताल शनिवार देर शाम प्रबंधन और श्रमिक प्रतिनिधियों के बीच हुई वार्ता के बाद समाप्त हो गई। समझौते के बाद सी-शिफ्ट से ठेका मजदूरों ने पुनः काम शुरू कर दिया, जिससे यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसील) प्रबंधन ने राहत की सांस ली।
नरवा पहाड़ खान प्रबंधक मनोज कुमार की पहल पर आयोजित वार्ता में प्रबंधन और ठेका मजदूरों के प्रतिनिधियों के बीच विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। वार्ता के बाद खान प्रबंधक मनोज कुमार ने बताया कि प्रोजेक्ट में कार्यरत सात ठेका कंपनियों में से अधिकांश संवेदकों ने बकाया वेतन का भुगतान कर दिया है, जबकि शेष एक-दो संवेदक 16 जून तक सभी लंबित वेतन का भुगतान कर देंगे।
उन्होंने कहा कि वेतन भुगतान को लेकर श्रमिकों की चिंताओं को गंभीरता से लिया गया है और भविष्य में श्रम कानूनों के अनुरूप निर्धारित समय सीमा के भीतर ठेका कर्मियों का मासिक वेतन सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।
बैठक में प्रबंधन की ओर से खान प्रबंधक मनोज कुमार और प्रशासनिक अधिकारी डी. हांसदा उपस्थित थे, जबकि ठेका मजदूरों की ओर से झामुमो पोटका प्रखंड अध्यक्ष सुधीर सोरेन ने प्रतिनिधित्व किया।
गौरतलब है कि “वेतन नहीं तो काम नहीं” के नारे के साथ करीब 300 ठेका कर्मी शुक्रवार से हड़ताल पर चले गए थे। झामुमो नेता एवं पोटका प्रखंड अध्यक्ष सुधीर सोरेन के नेतृत्व में शुरू हुई इस हड़ताल का असर यूसील के करीब 17 विभागों के कार्यों पर पड़ा था। हड़ताल के कारण कई महत्वपूर्ण विभागों में कामकाज प्रभावित हुआ और उत्पादन गतिविधियां बाधित हो गईं।
विशेष रूप से आउटसोर्सिंग कंपनी डीसीएस (डेल्टा) द्वारा संचालित नौवें लेवल पर यूरेनियम अयस्क उत्खनन का कार्य पूरी तरह ठप हो गया था। इसके साथ ही नरवा पहाड़ से जादूगोड़ा तक यूरेनियम अयस्क के परिवहन कार्य पर भी असर पड़ा, जिससे उत्पादन में लगभग 300 मीट्रिक टन की कमी आने की बात सामने आई।
जानकारी के अनुसार भूमिगत खदान के सैंड स्टोरिंग विभाग में कार्यरत 35 ठेका कर्मियों का अप्रैल माह से वेतन लंबित था, जिसे लेकर श्रमिकों में नाराजगी थी। हड़ताल के दौरान केवल यूसील के स्थायी कर्मचारी ही अपनी सेवाएं दे रहे थे।
हालांकि प्रबंधन और श्रमिकों के बीच सहमति बनने के बाद स्थिति सामान्य हो गई है। हड़ताल समाप्त होने के साथ ही उत्पादन और अन्य कार्यों को पुनः सुचारु रूप से संचालित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।









