कोल्हान में विशाल कृष्टि दीपा महोत्सव का आगाज, लाखों गुरुभाइयों के जुटान की तैयारी

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Jamshedpur:परम प्रेममय श्री श्री ठाकुर अनुकूल चंद्र जी के शुभ 138वें जन्म वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले कृष्टि दीपा महोत्सव (अखंड सिंहभूम महोत्सव) को लेकर कोल्हान क्षेत्र में तैयारियां जोरों पर हैं। इस विशाल आध्यात्मिक आयोजन को लेकर गुरुभाइयों के बीच उत्साह और उल्लास का माहौल देखने को मिल रहा है।

आचार्य देव श्री श्री बाबाई के आशीर्वाद से आगामी 15 नवंबर को गम्हरिया के रामचंद्रपुर फुटबॉल मैदान में आयोजित होने वाले इस महोत्सव में कोल्हान के तीनों जिलों से लाखों की संख्या में गुरुभाई,

गुरुमां, बच्चे और बुजुर्गों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
महोत्सव को लेकर झारखंड के विभिन्न जिलों में व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। गुरु भाइयों द्वारा घर-घर जाकर हैंडबिल बांटे जा रहे हैं तथा शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में बैनर-पोस्टर लगाए जा रहे हैं। वहीं आयोजन स्थल गम्हरिया के रामचंद्रपुर फुटबॉल मैदान में भव्य मंदिर, धर्मसभा और आनंद बाजार के लिए विशाल पंडाल का निर्माण भी तेजी से किया जा रहा है।

लौहनगरी जमशेदपुर के गुरुभाई शंभु बोस ने कहा कि जीवन में कई उत्सव देखने को मिले हैं, लेकिन कृष्टि दीपा महोत्सव का यह दृश्य अत्यंत प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है मानो आचार्य देव की कृपा सभी पर बरस रही है। उन्होंने सभी दादा-मां, भाई-बहन, बच्चों और बुजुर्गों से इस सेवा अवसर में भाग लेकर महोत्सव को सफल बनाने की अपील की।

सत्संग विहार टाटानगर के ऋतिक भास्कर शरण (राजू दा) ने बताया कि ठाकुर जी को “परम प्रेममय” कहा जाता है, क्योंकि वे प्रेम, सहानुभूति और सेवा के साक्षात स्वरूप हैं। उनके आदेशों का पालन करना ही उनके प्रति सच्चा प्रेम है। उन्होंने कहा कि ठाकुर जी के विचारों को केवल श्रद्धा तक सीमित न रखकर दैनिक जीवन में आचरण के रूप में अपनाना चाहिए।

आदित्यपुर के गुरुभाई रौनक ने कहा कि मनुष्य के अहंकार का विषय परमपिता ही होने चाहिए और उसी में आनंद का अनुभव करना चाहिए। वहीं मदन दा ने अनुश्रूति प्रथम खंड के 28वें सूत्र का उल्लेख करते हुए सहनशीलता और क्षमा को जीवन की सच्ची शक्ति बताया।

परसुडीह के गुरुभाई अरुण मन्ना ने कहा कि शरीर की देखभाल अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यही हमारा पहला ठाकुरघर है। इसे स्वस्थ, सशक्त और स्वच्छ बनाए रखना चाहिए। उन्होंने सदाचार, संतुलित आहार और निरंतर नाम-स्मरण को जीवन में अनुशासन और आनंद का आधार बताया।

महोत्सव से पूर्व सभी गुरुभाइयों ने एक स्वर में कहा कि सेवा, अनुशासन और सकारात्मक जीवन दृष्टि ही सच्चे आध्यात्मिक जीवन की पहचान है।

साथ ही सभी ने आगामी 15 नवंबर को होने वाले इस भव्य कृष्टि दीपा महोत्सव को सफल बनाने का संकल्प लेते हुए एक-दूसरे को “रा नंदित जय गुरु” कहकर शुभकामनाएं दीं।

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