Chaibasa :झारखंड स्थापना दिवस (15 नवंबर) को लेकर पश्चिमी सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के सह सचिव मोहित सुल्तानिया ने राज्यवासियों से एक संवेदनशील अपील की है—“झारखंड दिवस को केवल उत्सव नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व का दिन बनाएं।”
उन्होंने कहा कि “झारखंड दिवस आत्ममंथन का अवसर है—यह गौरव और संकल्प दोनों का प्रतीक होना चाहिए।” सुल्तानिया ने राज्य की ऐतिहासिक विरासत को याद करते हुए कहा कि यही वह पवित्र धरती है जहाँ भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धू-कानू, चांद-भैरव, और पोटो हो जैसे वीरों ने अपने आंदोलन और बलिदान से स्वतंत्रता और स्वाभिमान की नई चेतना जगाई थी।
सुल्तानिया ने कहा कि झारखंड महज़ एक प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि “पहचान” और “आशा” का प्रतीक है। उन्होंने राज्यवासियों से सवाल किया—
“क्या आज भी वह सपना जीवित है जिसके लिए यह राज्य बना था? क्या हमारे युवाओं को अपने ही राज्य में पर्याप्त अवसर मिल रहे हैं? क्या हमारी धरती, जंगल और जलस्रोत सुरक्षित हैं?”
उन्होंने आग्रह किया कि इस झारखंड दिवस पर केवल सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि नीति संवाद और विकास समीक्षा भी होनी चाहिए। सरकार से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं को स्थानीय उद्योग, स्टार्टअप और कौशल प्रशिक्षण से जोड़ा जाए, तथा पंचायत स्तर तक पर्यावरण संरक्षण की ठोस पहल शुरू की जाए।
सुल्तानिया ने कहा कि झारखंड को राजनीति से ऊपर उठाकर विकास का उदाहरण बनाना होगा—
“स्वरोजगार, कृषि और स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देना, भाषा-संस्कृति का संरक्षण और जंगल-जमीन-जल की रक्षा आज की सबसे बड़ी जरूरत है।”
अपने संदेश के अंत में उन्होंने कहा—
“झारखंड सिर्फ एक राज्य नहीं, यह पीढ़ियों की उम्मीदों की ज़मीन है। इस बार ऐसा दीप जलाएं जो सिर्फ घर नहीं, झारखंड के भविष्य को रोशन करे।”









